नवनाथ बन व संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Navnath Ban Attacks Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति में वाकयुद्ध एक बार फिर गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना (UBT) नेता संजय राऊत और उद्धव ठाकरे पर कड़ा प्रहार किया है। ‘नारी शक्ति विधेयक’ (महिला आरक्षण विधेयक) और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन को लेकर संजय राऊत द्वारा की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए नवनाथ बन ने उन्हें अपनी मर्यादा में रहने की सलाह दी है। भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन नेताओं ने कभी जमीनी स्तर पर चुनाव नहीं लड़ा, उन्हें निर्वाचन क्षेत्रों की बनावट पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
नवनाथ बन ने संजय राऊत की चुनावी साख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे और संजय राऊत ने आज तक कभी नगर निगम (मनपा) का चुनाव भी नहीं लड़ा है। उन्होंने कहा राऊत को खुद का कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, वे पिछले दरवाजे से संसद में आते हैं। इसलिए वे यह न सिखाएं कि निर्वाचन क्षेत्रों को कैसे तोड़ा या जोड़ा जाएगा।बन ने राऊत को ‘व्यर्थ की बड़बड़’ बंद करने की चेतावनी दी और कहा कि कल जब संसद में विपक्षी दल भी इस विधेयक का समर्थन करेंगे, तब राऊत को मुंह की खानी पड़ेगी।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर नवनाथ बन ने कहा कि यह ‘भाजपा शक्ति’ नहीं बल्कि ‘भारत शक्ति’ विधेयक है। उन्होंने राऊत पर निशाना साधते हुए कहा संजय राऊत इस बिल का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी पार्टी में महिलाओं को गाली दी जाती है। उन्हें डर है कि यदि यह बिल आया और महिलाओं का नेतृत्व आगे बढ़ा, तो उनकी पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। राऊत नहीं चाहते कि देश की महिलाओं को उनका उचित सम्मान मिले।
भाजपा प्रवक्ता ने संजय राऊत पर देश में दरार पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राऊत इस विधेयक के बहाने ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ का विवाद खड़ा कर देश के टुकड़े करना चाहते हैं। संजय राऊत के मन में कितनी भी इच्छा हो कि देश में आग लगे, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा। पूरा देश और नारी शक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे मजबूती से खड़ी है।
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विपक्षी सांसदों द्वारा विशेष सत्र और आगामी चुनावों का बहाना बनाने पर भी नवनाथ बन ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि 5 राज्यों के चुनाव केवल विपक्ष के लिए नहीं हैं, भाजपा के सांसद भी उतनी ही मेहनत कर रहे हैं। भाजपा सांसद घर पर नहीं बैठते, वे जनता के बीच रहते हैं। विपक्ष हार तय मान चुका है, इसलिए संसद में न आने के बहाने ढूंढ रहा है और पराभव के कारण अभी से तलाश रहा है।