डिग्री है, लेकिन अदद नौकरी नहीं, सरकारी नौकरी में आयुष डिग्रीधारियों को भी मिले मौका

Maharashtra Health News: महाराष्ट्र के आयुष डॉक्टरों ने केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव को पत्र लिखकर पृथक आयुष मंत्रालय और NHM में भर्ती समेत 5 प्रमुख मांगें रखी हैं।
AYUSH doctors from Maharashtra have written a letter to Union Minister Prataprao Jadhav
प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • महाराष्ट्र के आयुष डॉक्टरों ने केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव को पत्र लिखा।

  • सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और स्वास्थ्य केंद्रों में काम का अवसर मांगा।

  • अलग आयुष मंत्रालय और परीक्षा के पांच मौके देने की मांग की।

Ayush Doctors Maharashtra Union: महाराष्ट्र के आयुष डॉक्टरों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने की मांग उठाई है। इस संबंध में इंटिग्रेटेड डॉक्टर्स एसोसिएशन (नेशनल) ने केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव को पत्र लिखकर पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमोल अंबेकर, महाराष्ट्र अध्यक्ष डॉ. करणसिंह गाडे और अन्य पदाधिकारियों ने सरकार से इन मांगों पर विचार करने की अपील की है।

संगठन का कहना है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति के योग्य डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अधिक अवसर मिलने चाहिए। इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है।

NHM और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अवसर देने की मांग

संगठन की पहली मांग है कि बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस डिग्रीधारकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत काम करने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी उनकी नियुक्ति का रास्ता खोला जाए। समुदाय स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) जैसे पदों के लिए भी उन्हें आवेदन करने की अनुमति देने की मांग की गई है।

दूसरी मांग मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर है। संगठन ने सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले ऐसे प्रमाणपत्रों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की अपील की है, ताकि पात्र आयुष डॉक्टरों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों की मान्यता को लेकर असमंजस न रहे।

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अलग आयुष संचालनालय और मंत्रालय बनाने की मांग

तीसरी और चौथी मांग महाराष्ट्र राज्य में अलग आयुष संचालनालय और पृथक आयुष मंत्रालय के गठन से जुड़ी हैं। संगठन के अनुसार, फिलहाल आयुष क्षेत्र से संबंधित कामकाज अलग-अलग विभागों में बंटा हुआ है। ऐसे में एक स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था बनने से नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा हो सकती है।

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छात्रों को परीक्षा के लिए एक अतिरिक्त मौका देने की अपील

पांचवीं मांग आयुष पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों से संबंधित है। संगठन ने पहले वर्ष की परीक्षा पास करने के लिए उपलब्ध चार अवसरों को बढ़ाकर पांच करने की मांग की है। उसका कहना है कि कोरोना काल के दौरान पढ़ाई प्रभावित होने के कारण कुछ विद्यार्थियों को राहत मिलनी चाहिए।

डॉ. अमोल अंबेकर के अनुसार, आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टरों को सरकारी योजनाओं में अवसर मिलने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने योग्यता के आधार पर आयुष डॉक्टरों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने की जरूरत बताई।