ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए मिले अतिरिक्त समय, अमीन पटेल ने सरनाईक को लिखा लेटर

Amin Patel Demand: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने पर विवाद। कांग्रेस नेता अमीन पटेल ने प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की।
Marathi language requirement for taxi drivers Amin Patel letter to Pratap Sarnaik
अमीन पटेल और प्रताप सरनाईक(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Amin Patel Letter Pratap Sarnaik: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के मुद्दे ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस नियम के कार्यान्वयन और समय सीमा को लेकर राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

इसी क्रम में, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता अमीन पटेल ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को एक औपचारिक पत्र लिखकर अमराठी चालकों के लिए मराठी सीखने की समय सीमा बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है।

रोजी-रोटी पर मंडराता संकट

अमीन पटेल ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि मुंबई एक ऐसा शहर है जहां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे विभिन्न राज्यों से लोग अपनी आजीविका की तलाश में आते हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो टैक्सी या रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं।

परिवहन विभाग के नए नियमों के अनुसार, इन सभी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि वे यात्रियों के साथ बेहतर संवाद कर सकें और नियमों का पालन कर सकें। अमीन पटेल का कहना है कि यदि ये चालक तय समय सीमा के भीतर मराठी नहीं सीख पाते, तो उन पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो सकती है, जिससे उनके रोजगार पर सीधा प्रहार होगा।

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मराठी का समर्थन, लेकिन समय की कमी पर सवाल

दिलचस्प बात यह है कि अमीन पटेल ने स्पष्ट किया है कि वे इस नियम के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, मेरा भी यह दृढ़ मत है कि मुंबई में काम करने वाले अमराठी नागरिकों को मराठी बोलना आना चाहिए। हालांकि, उनका मुख्य विरोध विभाग द्वारा दी गई अत्यंत कम समय सीमा को लेकर है।

उनका तर्क है कि किसी भी व्यक्ति के लिए इतने कम समय में एक नई भाषा में दक्षता हासिल करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि इस मुद्दे को सहानुभूति पूर्वक देखा जाए और चालकों को पर्याप्त समय दिया जाए ताकि उनकी रोजी-रोटी पर कोई आंच न आए।

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सियासी गलियारों में भाषाई मुद्दा

अमीन पटेल की यह मांग ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ है। जैसा कि हाल ही में रोहित पवार ने भी आरोप लगाया था कि सत्ता पक्ष द्वारा भाषा के नाम पर राजनीति की जा रही है, अमीन पटेल का यह पत्र उसी कड़ी में एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पटेल ने सरकार से कानून के दायरे में रहकर इस मांग पर विचार करने और समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है ताकि गरीब चालकों के हितों की रक्षा हो सके।

अब देखना यह होगा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक इस विनती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या हजारों टैक्सी-रिक्शा चालकों को अपनी भाषा सुधारने के लिए अतिरिक्त मोहलत मिलती है या नहीं। अमीन पटेल के इस कदम ने निश्चित रूप से मुंबई के प्रवासी श्रमिक वर्ग के बीच एक नई उम्मीद जगाई है।

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