

Rohit Pawar Slams BJP: महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता और भाषाई पहचान का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट के नेता रोहित पवार ने भारतीय जनता पार्टी और वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया है कि समाज को भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने वाली राजनीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान रोहित पवार ने मराठी मानुस के मुद्दे पर अपनी विचारधारा को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने समावेशी राजनीति की वकालत करते हुए कहा कि मराठी होने की पहचान केवल संकुचित दायरे में नहीं बंधी होनी चाहिए।
पवार के अनुसार, हमारा साफ कहना है कि जो लोग भी यहां पैदा हुए हैं, जो यहां की माटी का सम्मान करते हैं और यहां के लोगों का सम्मान करते हैं, वे सभी हमारे लिए मराठी मानुस हैं। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि ऐसे लोगों की गरिमा और उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ या कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रोहित पवार ने भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग ओबीसी बनाम गैर-ओबीसी और मराठी बनाम गैर-मराठी के नाम पर राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।
रोहित पवार के मुताबिक, यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र के आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में भाषा के नाम पर नफरत फैलाकर सत्ता पाने की कोशिशें सफल नहीं होने दी जाएंगी।
भाषाई गौरव को लेकर पवार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में रहते हुए मराठियों के खिलाफ कोई भी विवादित या अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति मराठियों के खिलाफ विवादित टिप्पणी करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रोहित पवार का मानना है कि राजनीति विकास और जनहित के मुद्दों पर होनी चाहिए, न कि लोगों को उनकी भाषा या मूल स्थान के आधार पर लड़ाने के लिए।
रोहित पवार का यह बयान महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए यह संदेश दिया है कि महाराष्ट्र की संस्कृति और यहाँ की एकता को चुनावी लाभ के लिए दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
पवार ने दोहराया कि राज्य में शांति और भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और भाषा के आधार पर भेदभाव पैदा करने वाली किसी भी विचारधारा का वे डटकर मुकाबला करेंगे।
इस प्रकार, रोहित पवार ने अपने बयान के माध्यम से न केवल भाजपा की चुनावी रणनीति पर प्रहार किया है, बल्कि मराठी मानुस की एक ऐसी उदार छवि पेश की है जो सभी का सम्मान करने और साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।