कांग्रेस-राकां (शरद पवार) का सहारा छोड़ें, संजय राऊत पर आनंद परांजपे का पलटवार
Maharashtra Politics: आनंद परांजपे ने संजय राऊत पर पलटवार करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) को कांग्रेस और राकां (शरद पवार) का सहारा छोड़ देना चाहिए और बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व पर लौटना चाहिए।
- Written By: अर्पित शुक्ला
आनंद परांजपे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mumbai News: मुंबई में बीजेपी के नए प्रदेश कार्यालय के भूमिपूजन के मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा था कि बीजेपी को अब बैसाखियों की जरूरत नहीं है. इस पर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) पार्टी के सांसद संजय राऊत ने उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और एकनाथ शिंदे का फटकार लगाते हुए महायुति सरकार से बाहर निकलने की नसीहत दी थी. राकां (अजीत पवार) के मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे ने अब पलटवार करते हुए राऊत को मुंहतोड़ जवाब दिया है.
परांजपे ने कहा है कि यूबीटी को सबसे पहले दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व के विचारों पर चलते हुए कांग्रेस और राकां शरदचंद्र पवार पार्टी की बैसाखी को छोड़ना चाहिए.
भांडुप में रहनेवाले राऊत पर परोक्ष हमला करते हुए आनंद परांजपे ने कहा कि “भांडुप के भोंगे” को दूसरों को मुफ्त में सलाह देने की बजाय पहले बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व और मराठी स्वाभिमान के विचारों पर आत्मचिंतन करना चाहिए. उनके अंदर “यदि हिंदुत्व और स्वाभिमान की विचारधारा अब भी जीवित है, तो कांग्रेस और राकां (शरद पवार) का सहारा तुरंत छोड़ देना चाहिए. उन्हें बालासाहेब ठाकरे के वे विचार याद करने चाहिए. उन्होंने कहा था कि जिस दिन मेरी शिवसेना कांग्रेस बनेगी, उस दिन मैं दुकान बंद कर दूंगा.
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रोहित और आव्हाड पर निशाना
परांजपे ने राकां शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक रोहित पवार पर निशाना साधते हुए कहा, “वह मुख्य नेतृत्व बनने की जल्दबाजी में हैं. उन्हें दूसरों पर बोलने की बजाय अपने ही दल की गिरती स्थिति और पार्टी छोड़कर जा रहे नेताओं पर ध्यान देना चाहिए. यही उनके लिए बेहतर होगा. संग्राम जगताप के संदर्भ में परांजपे ने कहा कि वह अजीत पवार के नेतृत्व में विश्वास रखने वाले विधायक हैं. डीसीएम अजीत और सुनील तटकरे ने जो समझाना था, वह पहले ही समझा चुके हैं.
रोहित को उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है. इसी तरह उन्होंने राकां शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड पर शब्दों के बाण चलाते हुए उन्हें नौटंकीबाज कहा. परांजपे ने कहा कि आव्हाड वोटर लिस्ट में दोहरे नामों पर आपत्ति जता रहे हैं, जबकि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में 19,000 दोहरे नाम हैं. मुंब्रा-कलवा और कल्याण ग्रामीण में लगभग 14,000 डुप्लिकेट नाम हैं. लेकिन उन्होंने कभी आवाज नहीं उठाई.
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उन्हें पहले यह स्वीकार करना चाहिए कि उनके क्षेत्र में भी बोगस मतदाता मौजूद हैं. परांजपे ने कहा कि आव्हाड कहते हैं कि हमारे दल का समय खत्म हो गया, लेकिन उन्हें अपने शहर की स्थिति देखनी चाहिए, जहां उनके जिलाध्यक्ष, युवा अध्यक्ष, उनके घर के पूर्व नगरसेवक अमित सरैया और कलवा के 9 में से 7 नगरसेवक पार्टी छोड़ चुके हैं. यह उनके दल की हालत है, न कि हमारी.
