

Amruta Fadnavis Expresses Trust In Manoj Jarange: महाराष्ट्र की राजनीति और मराठा आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे के बीच एक बेहद भावुक और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। जालना के अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए विशाल आंदोलन और उपवास की तैयारी कर रहे मराठा नेता मनोज जरांगे पाटील पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गहरा भरोसा जताया है।
अहिल्यानगर में आयोजित समर्पण चतुर्मास कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचीं अमृता फडणवीस ने जरांगे पाटील को अपना भाई संबोधित करते हुए कहा कि आगामी गणेशोत्सव और त्योहारों के दिनों की महत्ता को समझते हुए उनके भाई जो भी कदम उठाएंगे, वह पूरी तरह शांतिपूर्ण ही होगा।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील ने 15 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान की ओर कूच करने का ऐलान किया है। यह आंदोलन अंतरवाली सराटी से शुरू होकर पाटोदा, अहिल्यानगर, हडपसर और खोपोली के रास्ते 5 दिनों की यात्रा तय करके मुंबई पहुंचेगा।
गणेशोत्सव के पावन अवसर पर इतने बड़े आंदोलन से मुंबई में कानून-व्यवस्था और यातायात को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। इसी संदर्भ में मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर अमृता फडणवीस ने स्पष्ट किया कि त्योहारों का समय होने के कारण मेरे भाई (मनोज जरांगे पाटील) शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए ही आंदोलन करेंगे।
अमृता फडणवीस और मनोज जरांगे पाटील के बीच भाई-बहन के इस आत्मीय रिश्ते की चर्चा पहले भी हो चुकी है। इससे पूर्व नागपुर में एक बयान के दौरान अमृता फडणवीस ने मनोज जरांगे को अपना भाई बताते हुए उन्हें अपने घर भोजन पर आने का स्नेहपूर्ण निमंत्रण दिया था।
इस निमंत्रण का जवाब भी मनोज जरांगे पाटील ने दिया था। जरांगे पाटील ने कहा था कि जब उनकी बहन उन्हें भाई दूज के अवसर पर बुलाएगी, तो वे निश्चित रूप से जाएंगे और अपनी बहन के लिए साड़ी-चोली का उपहार लेकर पहुंचेंगे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि फिलहाल उनका भाई गरीब मराठा बच्चों के भविष्य और आरक्षण के हक की लड़ाई में संघर्ष कर रहा है, लेकिन भाई दूज पर वे बहन के घर जरूर हाजिर होंगे।
दिलचस्प बात यह भी है कि अंतरवाली सराटी में आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए स्वयं मनोज जरांगे पाटील ने महिला कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर जाकर अमृता फडणवीस तथा लता एकनाथ शिंदे के साथ हलदी-कुंकू का पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया था।
एक तरफ जहां 15 सितंबर से निर्णायक आंदोलन की घड़ियां नजदीक आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर मेरा भाई कहकर अमृता फडणवीस द्वारा जताया गया यह विश्वास राजनीतिक गर्माहट के बीच सौहार्द और शांति की उम्मीद जगा रहा है।