अमृता फडणवीस के डिनर न्योते पर मनोज जरांगे बोले- बहन भाई दूज पर बुलाना, अभी भाई मुश्किल में है

Manoj Jarange Reply To Amruta Fadnavis: अमृता फडणवीस ने मनोज जरांगे को भाई बताते हुए डिनर का न्योता दिया था। जरांगे ने कहा कि आंदोलन के बीच अभी खाना खाने नहीं आ सकता पर भाई दूज के अवसर पर जरूर आऊंगा।
Manoj Jarange Reply To Amruta Fadnavis Dinner Invitation
अमृता फडणवीस और मनोज जारांगे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Manoj Jarange Reply Amid Protest In Jalna: मनोज जरांगे पाटिल के मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच अमृता फडणवीस के एक बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमृता फडणवीस ने मनोज जरांगे को अपना भाई बताते हुए उन्हें घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया था।

अब अंतरवाली सराटी में आंदोलन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए जरांगे ने इस न्योते पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमृता फडणवीस को संबोधित करते हुए कहा कि अभी आंदोलन चल रहा है और यह समय उनके लिए संघर्ष का है।

उन्होंने कहा कि जब भाई ‘युद्धक्षेत्र’ में हो तो बहनों को उन्हें खाने के लिए नहीं बुलाना चाहिए। जरांगे ने कहा कि उन्हें अपनी बहनों के प्रेम और भावना का सम्मान है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति में आंदोलन के बीच भोजन के लिए जाना उचित नहीं होगा।

बहन मुझे भाई दूज पर बुलाना

मनोज जरांगे ने कहा कि भाई दूज के अवसर पर बहनें उन्हें बुलाएं तो वह जरूर जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी बहनों के घर साड़ी-चोली लेकर जाने की परंपरा निभाते हैं और उस समय उनके साथ भोजन भी करेंगे। जरांगे ने अमृता फडणवीस के निमंत्रण को लेकर कहा कि यदि वह अभी आंदोलन के बीच खाना खाने चले जाते हैं तो इससे उनके संघर्ष पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान समर्थकों के साथ वह एक अहम लड़ाई लड़ रहे हैं और ऐसे समय में उन्हें अपनी भूमिका पर कायम रहना होगा।

जरांगे ने यह भी कहा कि बहनों को उनकी परिस्थिति को समझना चाहिए और उनके प्रति प्रेम की भावना बनाए रखनी चाहिए। उनके इस बयान को अमृता फडणवीस के साथ रिश्ते को लेकर नरम लेकिन राजनीतिक रूप से सतर्क प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

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हर बात को विवाद का विषय बनाने की जरूरत नहीं

मनोज जरांगे ने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी मुद्दे पर अच्छी नीयत से बात करता है तो हर बात को विवाद का विषय बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके जवाब में भी वही भावना है, जिस भावना से उन्हें निमंत्रण दिया गया था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वर्तमान समय आंदोलन का है और इस दौरान इधर-उधर जाना उचित नहीं होगा।

जरांगे ने कहा कि भाई-बहन का रिश्ता और भाईचारे की भावना अपनी जगह है, लेकिन फिलहाल मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष जारी है। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन समाप्त होने या भाई दूज जैसे अवसर पर वह निमंत्रण स्वीकार कर सकते हैं। इस बीच उनके बयान ने अमृता फडणवीस के ‘मनोज जरांगे मेरे भाई हैं’ वाले बयान को लेकर चल रही चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है।

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