

Mumbai News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने भारत के युवाओं के सामने कॅरियर को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत के करीब 63 प्रतिशत वर्कफोर्स को नए कौशल सीखने यानी री-स्किलिंग की जरूरत होगी।
वहीं, 2026 के अंत तक देश में करीब 3 करोड़ डिजिटल रूप से कुशल पेशेवरों की मांग रहने का अनुमान है। ऐसे में युवाओं के लिए पारंपरिक नौकरियों के बजाय एआई के साथ काम करने की क्षमता विकसित करना जरूरी हो गया है।
डेटा एंट्री, शेड्यूलिंग जैसे शुरुआती प्रशासनिक कार्य, रिपोर्ट का पहला ड्राफ्ट, बेसिक कॉपीराइटिंग, बेसिक कोडिंग और क्यूए टेस्टिंग जैसी भूमिकाओं पर एआई का दबाव बढ़ सकता है। इससे युवाओं के सामने ‘पहले नौकरी चाहिए, फिर अनुभव’ वाली चुनौती और गंभीर हो सकती है।
डायरेक्टर-इन-चार्ज और हेड ऑफ एकेडमिक्स, मणिपाल एकेडमी ऑफ बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज के डॉ. सौम्यदीप रॉय के मुताबिक, एआई मुख्य रूप से ‘नौकरियों’ को नहीं बल्कि ‘कार्यों’ को प्रभावित करता है। लेकिन जब किसी नौकरी के कई कार्य ऑटोमेट हो जाते हैं तो पूरी भूमिका का स्वरूप बदल जाता है। मैकिन्से के एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 51 प्रतिशत कंपनियां जेनएआई के कारण शुरुआती स्तर की भर्तियों में कमी कर रही हैं।
डॉ. रॉय के अनुसार, जहां ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ जरूरी है, वहां एआई इंसानों का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकता। संदर्भ आधारित निर्णय, जवाबदेही और भरोसे वाली भूमिकाएं जैसे डॉक्टर, जज और ऑडिटर में मानव हस्तक्षेप आवश्यक रहेगा। इसके अलावा कुशल कारीगर, हेल्थकेयर, फील्ड टेक्नीशियन, बिक्री, काउंसलिंग और क्लाइंट रिलेशन जैसे कामों में भी मानवीय कौशल महत्वपूर्ण रहेगा।
एआई/एमएल इंजीनियर, एआई गवर्नेंस एवं एथिक्स एक्सपर्ट, प्रॉम्प्ट इंजीनियर, एआई-ऑगमेंटेड साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ, डेटा ट्रस्ट एक्सपर्ट और ह्यूमन-एआई इंटरैक्शन डिजाइनर जैसी नई भूमिकाओं की मांग बढ़ने की संभावना है।
डॉ. रॉय ने युवाओं को ‘सब कुछ थोड़ा-थोड़ा’ सीखने के बजाय किसी एक क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता हासिल करने और साथ में क्रिटिकल थिंकिंग, संवाद क्षमता व समस्या समाधान जैसे ‘पावर स्किल्स’ विकसित करने की सलाह दी। हैकाथॉन, इंटर्नशिप और रियल प्रोजेक्ट्स के जरिए व्यावहारिक अनुभव हासिल करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई को दुश्मन नहीं, साथी मानना होगा। जो युवा एआई को अपनाते हुए अपनी मानवीय विशेषताओं और विशेषज्ञता को मजबूत करेंगे, वही भविष्य के रोजगार बाजार में आगे रहेंगे।