एआई का बढ़ता असर, एआई को कौशल-वृद्धि का अवसर समझें पत्रकार : बृजेश सिंह

Brijesh Singh: मुंबई में आयोजित “एआई परिषद 2026” में महाराष्ट्र के सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव बृजेश सिंह ने कहा कि पत्रकारों को एआई को खतरे के बजाय कौशल-वृद्धि का अवसर माने।
भारतीय भाषाएं और एआई, AI in journalism conference
AI Parishad 2026 Mumbai (सोर्सः सोशल मीडिया)
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AI Parishad 2026 Mumbai: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को खतरा मानने के बजाय पत्रकारों को इसे अपने कौशल को निखारने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। महाराष्ट्र शासन के सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव और महासंचालक बृजेश सिंह ने कहा कि सत्य की खोज और समाज का विश्वास ही पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे एआई कभी हासिल नहीं कर सकता।

मुंबई मराठी पत्रकार संघमें आयोजित “एआई परिषद 2026” के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि जिस तरह छपाई तकनीक और दूरदर्शन के आगमन से मीडिया का अंत नहीं हुआ, उसी तरह एआई भी पत्रकारिता को समाप्त नहीं करेगा। हालांकि जो कार्य स्वचालित हो सकते हैं, वे अब एआई के माध्यम से होंगे, जिससे पत्रकारिता का स्वरूप जरूर बदलेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अब ‘वन-मैन न्यूज़रूम’ की अवधारणा सामने आ रही है, जहां समाचार संकलन से लेकर प्रकाशन तक का कार्य एआई की मदद से किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की पहल

सिंह ने पत्रकारों को सचेत करते हुए कहा कि आपकी नौकरी एआई नहीं, बल्कि एआई सीखने वाला व्यक्ति ले सकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय जल्द ही पत्रकारों के लिए “AI in Journalism” नामक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है, ताकि वे बदलते तकनीकी दौर में खुद को अपडेट रख सकें।

डीपफेक का खतरा और विभाग की तैयारी

एआई के बढ़ते उपयोग के साथ डीपफेक जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। इससे निपटने के लिए विभाग ने एआई आधारित फैक्ट-चेक प्रणाली शुरू की है। इसके साथ ही ‘प्रोवेनेन्स तकनीक’ की मदद से तस्वीरों और वीडियो में डिजिटल हस्ताक्षर जोड़े जा रहे हैं, ताकि उनकी प्रामाणिकता की जांच की जा सके। उन्होंने बताया कि सरकारी सूचनाओं के प्रसार में भी एआई का उपयोग शुरू हो चुका है, जिससे खबरें अब रियल टाइम में कई भाषाओं में लोगों तक पहुंच रही हैं।

भारतीय भाषाएं और एआई की चुनौती

सिंह ने कहा कि एआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय भाषाओं और संस्कृति को समझना है। अधिकांश एआई मॉडल पश्चिमी डेटा पर आधारित हैं, जिससे वे मराठी जैसी भारतीय भाषाओं के संदर्भों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। इसके लिए भारत को अपना स्वतंत्र डेटा और एआई मॉडल विकसित करने की जरूरत है।

कार्यक्रम की शुरुआत में संघ के कार्यवाह शैलेंद्र शिरके ने स्वागत भाषण दिया, जबकि अध्यक्ष संदीप चव्हाण ने बदलते समय में पत्रकारों को तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की सलाह दी। कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष राजेंद्र हुंजे ने किया। इस अवसर पर स्वाति घोसालकर, देवदास मटाले सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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