Mumbai: भाई की रस्मों में शामिल होने की अर्जी पर हाईकोर्ट सख्त, अबू सलेम से कही ये बात
Maharashtra News: 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम की पैरोल याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यदि उसे भाई की रस्मों में शामिल होना है, तो पुलिस एस्कॉर्ट का पूरा खर्च खुद उठाना होगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
अबू सलेम (सौ. सोशल मीडिया )
Bombay High Court On Abu Salem: 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी करार दिए जा चुके गैंगस्टर अबू सलेम की पैरोल याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने साफ किया है कि भाई के निधन के बाद रस्मों में शामिल होने के लिए यदि सलेम को पैरोल चाहिए, तो उसे पुलिस एस्कॉर्ट का पूरा खर्च स्वयं उठाना होगा।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के अबू सलेम को पैरोल नहीं दी जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में सुरक्षा सर्वोपरि है और पुलिस एस्कॉर्ट अनिवार्य होगा।
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खर्च वहन करने की शर्त
अदालत ने कहा, “यदि आप बाहर जाना चाहते हैं, तो पुलिस एस्कॉर्ट के साथ जाना होगा और उसका पूरा खर्च आपको ही देना पड़ेगा। यदि आप यह खर्च नहीं उठा सकते, तो पैरोल नहीं मिलेगी।” इस टिप्पणी से अदालत का सख्त रुख साफ झलकता है।
वकील की दलील, सरकार का विरोध
अबू सलेम के वकील ने अदालत को बताया कि वह पिछले दो दशकों से जेल में बंद है और उसके पास पुलिस सुरक्षा का खर्च उठाने के लिए कोई आर्थिक साधन नहीं है। वहीं, सीबीआई और महाराष्ट्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए केवल दो दिन की सीमित पैरोल देने का समर्थन किया।
सीमित राहत के संकेत
हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि कानून के तहत यात्रा समय को छोड़कर अधिकतम चार दिन की पैरोल पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह पूरी तरह इस शर्त पर निर्भर करेगा कि अबू सलेम पुलिस एस्कॉर्ट का खर्च उठाने के लिए तैयार है या नहीं।
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अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई में अबू सलेम को स्पष्ट करने को कहा है कि वह एस्कॉर्ट खर्च वहन करने को तैयार है या नहीं। इसके बाद ही उसकी पैरोल याचिका पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
