बीजेपी शासित राज्यों में जानबूझकर मुस्लिमों को किया जा रहा टारगेट, सड़कों पर नमाज पर पाबंदी से भड़के अबू आज़मी

Abu Azmi Slams BJP: अबू आज़मी ने सड़कों पर नमाज पढ़ने पर लगी पाबंदी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की साजिश करार दिया। पूरी खबर पढ़ें।
Muslims Are Being Deliberately Targeted in BJP-Ruled States; Abu Azmi Outraged Over Ban on Offering Namaz on Roads
अबू आज़मी (सोर्स: फाइल फोटो)
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Abu Azmi Statement: कोलकाता में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज अदा करने पर हाल ही में लगाई गई पाबंदी और अब यूपी के सीएम के इसी विषय पर आये बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आज़मी ने तीखा हमला बोला है। मुंबई में मीडिया से बात करते हुए आज़मी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कदम किसी विशेष व्यवस्था सुधार के लिए नहीं, बल्कि एक खास समुदाय को हाशिए पर धकेलने के लिए उठाया गया है।

मजबूरी है, शौक नहीं

अबू आज़मी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को हर छोटे बड़े मुद्दे पर निशाना बनाया जा रहा है। सड़कों पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर सफाई देते हुए उन्होंने तर्क दिया, दुनिया भर में यह देखा जाता है कि जब मस्जिदों में जगह कम पड़ जाती है और भीड़ बढ़ जाती है, तो लोग मजबूरन कुछ समय के लिए बाहर नमाज पढ़ते हैं। यह कोई शौक से किया जाने वाला काम नहीं है, बल्कि जगह की भारी कमी के कारण की गई एक मजबूरी है। उन्होंने आगे जोड़ा कि नमाज केवल कुछ मिनटों की बात होती है, लेकिन इसे इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे यह कोई बहुत बड़ा व्यवधान हो।

बीजेपी और ध्रुवीकरण की राजनीति पर वार

आज़मी ने अपने बयान में केवल एक राज्य की बात नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक माहौल पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में, एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जहाँ अल्पसंख्यकों को उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित किया जा सके।

उन्होंने कहा, आज पूरे देश में एक सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जहाँ लोगों को मस्जिदों के बाहर इबादत करने से रोका जा सके। यह सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय को कोने में धकेलने की कोशिश है। उनके अनुसार, इस तरह की पाबंदियां समुदायों के बीच दूरी बढ़ाने का काम करती हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

अबू आज़मी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। जहाँ एक पक्ष इसे सार्वजनिक व्यवस्था और ट्रैफिक के लिहाज से सही कदम बता रहा है, वहीं आज़मी जैसे नेता इसे धार्मिक भेदभाव का नाम दे रहे हैं। आज़मी ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को अपनी आस्था के पालन का अधिकार है और प्रशासन को पाबंदी लगाने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था करने पर ध्यान देना चाहिए।

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