

मुंबई पुलिस ने देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया
मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े ऑडियो क्लिप मामले की होगी निष्पक्ष जांच
विवादित ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए आदेश जारी हुए
Manoj Jarange 500 Crore Audio Clip SIT Probe: महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाने वाले मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपये के लेन-देन और विवादित ऑडियो क्लिप मामले में मुंबई पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है।
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए मुंबई पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए तीन SIT का गठन किया है। मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह एसआईटी विवादित ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच करेगी।
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, एसआईटी की कमान दक्षिण क्षेत्र (मुंबई) के अपर पुलिस आयुक्त शैलेश बलकवड़े को सौंपी गई है। इस तीन सदस्यीय जांच दल में कुछ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
शैलेश बलकवड़े (अपर पुलिस आयुक्त, दक्षिण क्षेत्र) एसआईटी प्रमुख
विजयकांत सागर (पुलिस उपायुक्त, जोन 3) सदस्य
बजरंग बंसोडे (पुलिस उपायुक्त, साइबर क्राइम ब्रांच) सदस्य
एसआईटी प्रमुख को जांच की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त अधिकारियों को शामिल करने का अधिकार दिया गया है और उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त को नियमित रूप से जांच की प्रगति की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। एसआईटी ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता, इसके स्रोत, इसमें बातचीत करने वाले व्यक्तियों की पहचान और कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन के दावों के साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल करेगी।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 22 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक विवादित ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की। जरांगे का आरोप था कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले उनके मराठा आरक्षण आंदोलन को प्रभावित करने के लिए भाजपा नेताओं द्वारा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जरिए 500 करोड़ रुपये का भुगतान व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया था।
सार्वजनिक की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग में एक महिला यह दावा करती सुनाई दे रही है कि एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए 500 करोड़ रुपये जरांगे तक पहुंचा दिए गए हैं। इस रिकॉर्डिंग में मराठवाड़ा में मनोज जरांगे के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विधानसभा चुनावों से पहले उनकी गतिविधियों को रोकने के तरीकों पर भी चर्चा शामिल है।
मनोज जरांगे पाटिल ने किसी भी प्रकार का धन प्राप्त करने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जरांगे ने कहा कि यह ऑडियो क्लिप उन्हें बदनाम करने और मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने की एक गहरी साजिश का पर्दाफाश करती है। उन्होंने मामले की बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के स्वतंत्र जांच की मांग की और जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
दूसरी तरफ, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई पैसा लिया है और न ही किसी को दिया है। उन्होंने जरांगे को सबूत पेश करने की चुनौती दी और जांच का समर्थन किया। वहीं, सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी आरोपों को खारिज करते हुए तंज कसा कि मैं भी उस व्यक्ति की तलाश कर रहा हूं जिसे 500 करोड़ रुपये दिए गए थे और सवाल उठाया कि आखिर यह कथित पैसा गया कहां।
इस विवाद के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। शिवसेना नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर ऑडियो क्लिप की निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसके बाद फडणवीस ने फॉरेंसिक जांच का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री ने यह सवाल भी उठाया था कि दो साल से अधिक पुरानी बताई जा रही बातचीत अचानक अब क्यों सामने आई है।
भाजपा नेताओं ने ऑडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ या इसे AI से तैयार किए जाने की आशंका जताई है। वहीं, संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस 500 करोड़ रुपये के लेन-देन की ED से जांच कराने की मांग की है। अब मुंबई पुलिस की एसआईटी इस पूरे मामले की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेगी।