पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी समेत 2 भाजपा नेता बरी, 2004 में पुलिस पर हमले का मामला

Gopal Shetty: विशेष सांसद एवं विधायक अदालत ने भाजपा नेताओं और पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और गणेश खनकर को 2004 के एक मामले में बरी कर दिया है।
पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी समेत 2 भाजपा नेता बरी
पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी समेत 2 भाजपा नेता बरी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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2 BJP Leaders Acquitted: एक विशेष सांसद और विधायक अदालत ने भाजपा नेताओं और पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और गणेश खनकर को 2004 के एक मामले में बरी कर दिया है, जिसमें एक अन्य भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों पर हमला और दुर्व्यवहार किया गया था। विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर ने कहा, "रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्य, उचित संदेह से परे, आवश्यक तत्वों को स्थापित करने में विफल रहे।

अभियोजन पक्ष (कांस्टेबल) के मामले का आंशिक रूप से समर्थन करने वाला एकमात्र गवाह शिकायतकर्ता था। जिरह के दौरान उसकी गवाही भी विरोधाभासी, अस्पष्ट और काफी कमज़ोर थी।" न्यायाधीश ने आगे कहा, "एफआईआर में नाम होने के बावजूद, किसी भी स्वतंत्र या तटस्थ गवाह से पूछताछ नहीं की गई और किसी अन्य अधिकारी ने आरोपों का समर्थन नहीं किया। जांच अधिकारी (आईओ) ने स्वयं एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की।" इसलिए, अभियोजन पक्ष के मामले पर गंभीर संदेह पैदा होता है, न्यायाधीश ने कहा।

नेताजी शिंदे की गिरफ़्तारी के विरोध में कथित हमला

मामले में मिली जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर, 2004 की मध्यरात्रि को कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने के अधिकारियों ने भाजपा नेता नेताजी शिंदे के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र ख़तरनाक गतिविधियां निवारण अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई शुरू की थी। शेट्टी और खांकर इस कार्रवाई का विरोध करने के लिए रात 1 बजे थाने पहुंचे।

शिकायतकर्ता वाला कांस्टेबल

शिकायतकर्ता कांस्टेबल उदय मोहिते ने कहा कि अपने वरिष्ठों के निर्देश पर उन्होंने दोनों और उनके साथ आए प्रदर्शनकारियों को रोका। एफआईआर में कहा गया है कि शेट्टी और खानकर मोहिते को धक्का देकर थाने में घुस गए।

कोई स्वतंत्र गवाह नहीं

मोहिते ने आगे आरोप लगाया कि उन्होंने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे "अगले कुछ महीनों में" उसका जीना मुश्किल करने की धमकी दी। इसके बाद, उसके खिलाफ न केवल पुलिस अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने, बल्कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी मामला दर्ज किया गया। उसके खिलाफ 10 सितंबर, 2004 को मामला दर्ज किया गया था।

सरकारी अभियोजकों के साक्ष्य को कमज़ोर और विरोधाभास पाया

अदालत ने उन्हें बरी करते हुए कहा मुकदमे के दौरान मोहिते ने अपना पक्ष रखा और कोई शिकायत दर्ज कराने से इनकार किया। अदालत ने यह भी बताया कि एक अन्य गवाह, जांच अधिकारी, भी अपना पक्ष रख रहा था। इसलिए, नेताओं के खिलाफ कोई सबूत नहीं था।

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