

Mumbai Metro Line 6 Progress Update: मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने मेट्रो लाइन 6 परियोजना को नई रफ्तार दे दी है।
जोगेश्वरी में पश्चिम रेलवे मार्ग पर अत्यंत चुनौतीपूर्ण रेलवे दूसरा स्टील कॉम्पोजिट स्पैन को रिकॉर्ड समय में तैयार कर एजेंसी ने इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है।
यह मेट्रो लाइन 6 अंधेरी लोखंडवाला स्थित स्वामी समर्थ नगर से विक्रोली के बीच पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। साथ ही यात्रा समय घटाएगी और मुंबईकरों को तेज, सुरक्षित व कुशल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी।
इस परियोजना में लगातार दो स्टील स्पैन की सफल स्थापना के साथ परियोजना के एक महत्वपूर्ण अभियांत्रिकी चरण को पूरा कर लिया गया है। इस काम के लिए जहां तीन घंटे से अधिक का ट्रैफिक ब्लॉक निर्धारित था, वहीं इसे महज 1.35 घंटे में पूरा कर लिया गया।
इस तेज और सटीक कार्यान्वयन के साथ ही मेट्रो लाइन 6 प्रोजेक्ट 88 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, जिससे इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद और मजबूत हो गई है। नए स्थापित स्पैन की लंबाई 31.16 मीटर और वजन लगभग 90 मेट्रिक टन है।
इसमें स्टील कॉम्पोजिट गर्डर्स, डायफ्राम्स और ब्रेसिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिन्हें दीर्घकालिक मजबूती और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। विशेष बात यह है कि पश्चिम रेलवे द्वारा इस कार्य के लिए 8 घंटे 10 मिनट का ट्रैफिक ब्लॉक मंजूर था, लेकिन एमएमआरडीए ने इसे महज 1 घंटा 35 मिनट में पूरा कर दक्षता और सटीक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। इससे रेलवे यातायात पर न्यूनतम असर पड़ा और सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित हुआ।
मेट्रो लाइन 6 परियोजना की गति अब उल्लेखनीय रूप से बढ़ गई है। विशेष रूप से जटिल अभियांत्रिकी कार्य जिस गति और सटीकता से पूरे किए जा रहे हैं, वह सराहनीय है। उच्चतम सुरक्षा मानकों, दक्षता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के साथ इस परियोजना को पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध है।
- संजय मुखर्जी, आयुक्त, एमएमआरडीए
इस जटिल प्रक्रिया में ओवरहेड इक्विपमेंट बंद करना, वायर नीचे करना, भारी स्पैन को उठाकर सटीक स्थान पर स्थापित करना, स्ट्रक्चरल फिक्सिंग, निरीक्षण और रेलवे प्रणाली को पुनः चालू करना जैसे कई संवेदनशील चरण शामिल थे। इसके लिए 500 टन और 600 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेनों का उपयोग किया गया। साथ ही एमएमआरडीए, ठेकेदारों और पश्चिम रेलवे के बीच समन्वय बनाए रखा गया।