मुंबई में फिर भड़का सफेद पट्टी विवाद; मलाड में जैन समुदाय की व्हाइट लाइन पर मनसे का कड़ा प्रहार, देखें VIDEO

Mumbai White Line Controversy: मुंबई के मलाड में जैन समुदाय द्वारा खींची गई सफेद पट्टी को लेकर मनसे कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। जानें क्या है यह पूरा विवाद और क्यों गरमाया मामला।
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मुंबई में सफेद पट्टी पर स्प्रे पेंट करते हुए मनसे के कार्यकर्ता (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Malad Jain Community White Line Controversy: आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर सफेद पट्टी को लेकर विवाद गरमा गया है। अभी कुछ ही दिन बीते थे जब घाटकोपर का ऐसा ही एक मामला शांत हुआ था, लेकिन अब मलाड ईस्ट में इसी मुद्दे ने फिर से तूल पकड़ लिया है। इस बार राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता पूरी तरह से आक्रामक मूड में नजर आ रहे हैं।

ताजा मामला मलाड ईस्ट के दफ्तरी रोड का है, जहां जैन समुदाय के लोगों द्वारा सड़क पर एक सफेद पट्टी पेंट की गई थी। जैसे ही इसकी खबर मनसे को लगी, पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। मनसे के मलाड विभाग अध्यक्ष महेश फरकासे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया।

सफेद पट्टी के ऊपर लाल रंग से पोता

विरोध प्रदर्शन के दौरान मनसे कार्यकर्ताओं ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उस सफेद पट्टी के ऊपर लाल रंग से जाहिर निषेध मतलब सार्वजनिक विरोध लिख दिया। मनसे का स्पष्ट रुख है कि सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह से अवैध रूप से पट्टियां बनाना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक सड़कों पर अवैध पेंटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। स्थिति को बिगड़ता देख बीएमसी ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उस लाल रंग के ग्रैफिटी के ऊपर काला रंग पोत दिया, जिससे मामला फिलहाल के लिए शांत हुआ है। इस दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

घाटकोपर विवाद की यादें हुई ताजा

यह पहली बार नहीं है जब मुंबई में सफेद पट्टी को लेकर इस तरह का घमासान मचा हो। अभी जून के महीने में ही घाटकोपर पूर्व स्थित कैलास एवेन्यू सोसाइटी में भी ठीक ऐसा ही विवाद सामने आया था। उस समय सोसाइटी परिसर के अंदर खींची गई एक सफेद पट्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसे एक निवासी प्रसाद वेदपाठक ने पोस्ट किया था।

देखते ही देखते वह मामला इतना बढ़ गया कि उसने धार्मिक और सामाजिक मोड़ ले लिया था। सोसाइटी दो गुटों में बंट गई थी और परिसर में भारी तनाव का माहौल पैदा हो गया था। उस समय पुलिस की मध्यस्थता और लंबी बातचीत के बाद बीच का रास्ता निकाला गया और सफेद पट्टी को हटाकर उस पर दूसरे रंगों से पेंट कर दिया गया था। तब ऐसा लगा था कि अब यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है, लेकिन मलाड की घटना ने साबित कर दिया कि यह चिंगारी अभी भी बाकी है।

आखिर क्यों बनाई जाती हैं ये सफेद पट्टियां?

इस पूरे विवाद के पीछे का तर्क अक्सर धार्मिक और जीव-दया से जुड़ा होता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, मानसून के दौरान सड़कों पर फिसलन पैदा करने वाली काई को जमने से रोकने के लिए ये पट्टियां बनाई जाती हैं। इसके अलावा, इनका एक मुख्य उद्देश्य यह होता है कि सड़क पर चलने वाले छोटे जीव या कीड़े-मकौड़े इन पट्टियों पर आसानी से दिखाई दे सकें, ताकि वे राहगीरों के पैरों के नीचे आकर कुचले न जाएं।

हालांकि, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी राजनीतिक पार्टियों का तर्क है कि निजी आस्था या मान्यताओं के नाम पर सार्वजनिक सड़कों का इस तरह इस्तेमाल करना गलत है। फिलहाल मलाड में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक निगरानी के बीच शांति तो है, लेकिन मनसे की आक्रामकता ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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