‘हर स्त्री नवदुर्गा, अपनी शक्ति पहचानें’, लाडकी बहिन से महिला सुरक्षा तक…मंत्री माधुरी मिसाल ने दिए नवभारत के सवालों के जवाब
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर नवभारत ने अपने-अपने क्षेत्र की 9 प्रतिष्ठित महिलाओं के साक्षात्कार की श्रृंखला शुरू की है। इस संदर्भ में नवभारत संवाददाता ने महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री माधुरी मिसाल से खास बातचीत की।
- Written By: आकाश मसने
मंत्री माधुरी मिसाल (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: शक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्रि रविवार से शुरू हो गया है। 6 अप्रैल तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के अवसर पर नवभारत ने अपने-अपने क्षेत्र की 9 प्रतिष्ठित महिलाओं के साक्षात्कार की श्रृंखला शुरू की है। इस संदर्भ में आज नवभारत संवाददाता जितेंद्र मल्लाह ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक विकास और कल्याण मंत्रालय, चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय की राज्य मंत्री माधुरी मिसाल से उनके राजनीतिक जीवन के बारे में विशेष बातचीत की।
महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी विशेष पहचान बनाने वाली महिलाओं में शामिल मंत्री माधुरी मिसाल ने इस मौके पर सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। पेश है, मंत्र से संवाद के प्रमुख अंश…
1- आप राजनीति में कैसे आईं?
- जब मेरे पति का अचानक निधन हो गया, तब हमारे पूरे निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को लगा कि किसी को आगे आना चाहिए। इसलिए, उनके निधन के तीन-चार साल बाद मैं राजनीति में आई।
2- साधारण लोग राजनीति को अच्छा नहीं मानते, खासकर महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती माना जाता है। फिर भी, आपने इस क्षेत्र को चुना
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में पहली बार एलएसडी ड्रग्स की बड़ी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय स्तर के नशे की खेप जब्त, 2 आरोपी गिरफ्तार
ठाणे में खौफनाक वारदात: पत्नी की गला घोंटकर हत्या कर भागा पति, 24 घंटे में पनवेल से गिरफ्तार; जानें पूरा मामला
जनगणना 2027 में लापरवाही पर सख्ती: नागपुर के दो कॉलेज अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की तैयारी
नवी मुंबई में सीमेंट की बोरियों के नीचे छिपाया 1.25 करोड़ की शराब, आबकारी विभाग ने ऐसे किया तस्करी का भंडाफोड़
- जैसा कि मैंने आपको बताया, मैं संयोगवश राजनीति में आई। लेकिन एक बार इस क्षेत्र में आने के बाद, मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यह कुछ अलग जगह है। मुझे लगता है कि राजनीति भी किसी अन्य क्षेत्र की तरह ही एक क्षेत्र है। हम अच्छा काम कर सकते हैं। बल्कि, यहां महिलाओं को बहुत सम्मान मिलता है और उनकी कार्यक्षमता को पहचान मिलती है। बस यहां काम करना होता है और 100% देना पड़ता है।
3- महायुति सरकार की बहुचर्चित ‘लाडली बहन’ योजना पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आप एक आम महिला के रूप में इसे कैसे देखती हैं?
- चाहे विपक्ष कितने भी सवाल उठाए, लेकिन मुझे लगता है कि यदि किसी गृहिणी या घर में रहने वाली महिला को हर महीने 1500 रुपए मिलते हैं, तो उसका आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़ता है। मैंने देखा है कि ‘लाड़ली बहन’ योजना की किश्त से कई महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू किए और वे अपने घर में आर्थिक सहयोग देने में सक्षम हुईं। इसलिए, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
4- राज्य में कानून व्यवस्था, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठते हैं। विपक्ष ‘शक्ति कानून’ लागू करने की मांग कर रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
- ‘शक्ति कानून’ को लेकर बात की जाए तो राज्य सरकार ने इसे तैयार किया था और यह एक व्यापक कानून था। लेकिन जब इसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया, तो कुछ आपत्तियां आईं क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से जुड़ा हुआ था। अब केंद्र ने भी नए कानून बनाए हैं, जो ‘शक्ति कानून’ से काफी मिलते-जुलते हैं। इसलिए, हम सोच रहे हैं कि केंद्र के नए कानूनों को शामिल कर एक और बेहतर कानून बनाया जाए।
5- आप सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक विकास एवं कल्याण मंत्रालय, चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की मंत्री हैं। आपकी जिम्मेदारियों और योजनाओं के बारे में संक्षेप में बताएं।
- नगर विकास का मतलब है पूरे शहर का विकास, अल्पसंख्यक विभाग में विभिन्न जाति-धर्म के लोग आते हैं, जबकि समाज कल्याण सभी के लिए है। चिकित्सा शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण विभाग है। मुझे लगता है कि इन सभी विभागों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने का एक बेहतरीन अवसर मुझे मिला है। भाजपा की ‘अंत्योदय’ संकल्पना का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है और मैं अपने विभागों के जरिए इसे पूरा कर सकती हूं।
महाराष्ट्र की अन्य खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
6- नवरात्रि के अवसर पर आप राज्य की महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
- नवरात्रि के अवसर पर मैं कहना चाहूंगी कि स्त्री ही शक्ति है। उसे अपनी पहचान स्वयं बनानी है। अपनी शक्ति को पहचानें और किसी और से शक्ति की अपेक्षा न करें। जिस तरह आप अपने जीवन में संघर्षों का सामना करती हैं, वैसे ही देवी दुर्गा ने भी लड़ाइयां लड़ी थीं। इसलिए, हर स्त्री ही नवदुर्गा है। अपनी शक्ति को पहचानें, अपने आत्मसम्मान की रक्षा करें और आत्मविश्वास के साथ जीवन जिएं।
