(सौजन्य सोशल मीडिया)
नासिक: भगवान शिव का प्रिय महीना पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ उत्तर भारतीय परंपरा से जुड़े लोगों के लिये 22 जुलाई से शुरू हो चुका है जबकि मराठी संस्कृति में श्रावण मास की शुरुआत 15 दिन के बाद यानी 5 अगस्त से होने जा रही है। यहां श्रावण मास सोमवार 5 अगस्त से शुरू होकर 3 सितंबर तक जारी रहेगा। इसे लेकर शहर के साथ-साथ जिले के सभी शिव मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं।
पहले सोमवार को देखते हुए नाशिक शहर पुलिस आयुक्तालय और ग्रामीण पुलिस दल के साथ एसटी महामंडल की भी तैयारी हो चुकी है। पुलिस द्वारा शिव मंदिरों में होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुख्ता पुलिस बंदोबस्त किए हैं। एसटी महामंडल की ओर से भक्तों को शिव मंदिर पहुंचने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। श्रावण मास के अवसर पर शहर सहित जिले के सभी शिव मंदिर दूल्हन की तरह सज गए है। मंदिरों में आकर्षक रोशनाई की गई है।
हिंदू धर्म में श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा बहुत श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है। इस बार के सावन माह में दो दुलर्भ संयोग पड़ रहे हैं। पहला तो इस बार श्रावण मास की शुरुआत ही सोमवार से हो रही है और दूसरा इस बार सावन में कुल 5 सोमवार आ रहे हैं।
श्रावण में ज्यादातर श्रद्धालु सोमवार के दिन व्रत रखते हैं। अविवाहित लड़कियां मनचाहा पति पाने के लिए श्रावण के सोमवार और मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत भी रखती हैं। श्रावण के दौरान कांवड़ यात्रा भी बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र गंगा के पास विभिन्न धार्मिक स्थानों पर जाते हैं और वहां से गंगाजल लाकर शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को चढ़ाते हैं। हिंदू धर्म के ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने जग कल्याण के लिए स्वयं पी लिया था, ताकि समस्त जीव-जंतु बचे रहें। यह जहर उनके गले में ही रह गया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। इस जहर के प्रभाव को शांत करने के लिये तब सभी देवी-देवताओं और राक्षसों ने भगवान शिव को गंगाजल और दूध पिलाया ताकि जहर का असर कम हो सके। यही कारण है कि श्रावण में शिवजी को गंगाजल और दूध चढ़ाया जाता है।
इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें। फिर शिवजी और मां पार्वती की प्रतिमा रखें, दीप जलाएं और प्रार्थना करें। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र और श्रावण मास कथा का पाठ करें। इस दिन शिव मंदिर भी जाएं और शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, शक्कर, शहद और घी) व जल चढ़ाएं तथा शिवलिंग को फूलों और बेलपत्र से सजाएं। बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। भोग में मिठाई आदि चढ़ाएं।
ॐ नमः शिवाय !!
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ||
कर्पूर गौरं करुणावतारं संसार सारं, भुजगेंद्र हारम | सदा वसंतं हृदये, अरविंदे भवं भवानी सहितं नमामि ||
भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए इस पूरे माह प्रतिदिन उनका जलाभिषेक करें। प्रातःकाल पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। भक्त भगवान को बिल्व पत्र भी चढ़ाएं। सावन में रुद्राक्ष की पूजा करना और रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है। भक्तों को रुद्राक्ष की माला धारण कर शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस माह में महिलाएं मंगल गौरी व्रत भी रख सकती हैं। इस माह में गरीबों और विद्वानों को धार्मिक दान देना भी शुभ माना जाता है।
सावन में व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण न करें। फलाहार कर सकते हैं। सावन के दौरान प्याज़, पत्तेदार चीज़, मूली, लहसुन आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इस महीने में मांस खाना या शराब का सेवन वर्जित है। इस माह विशेष रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।