माराठा आरक्षण लागू करने की मांग के साथ मनोज जरांगे फिर अनशन पर, बढ़ी शिंदे सरकार की टेंशन
माराठा आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल अब एक बार फिर अनशन पर बैठ गए हैं। यह पांचवी बार है जब मनोज जारांगे आरक्षण के लिए अनशन कर रहे हैं।
- Written By: राहुल गोस्वामी
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे
मुंबई: माराठा आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल अब एक बार फिर अनशन पर बैठ गए हैं। जी हां, एक बार फिर देश में मराठा आरक्षण की मांग उठने लगी है। इस आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल एक बार फिर अपनी अन्य विभिन्न मांगों लेकर आमरण अनशन के लिए बैठ गए हैं।
मराठा आरक्षण के लिए मराठा समाज के नेता मनोज जारांगे पाटिल ने शनिवार से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। यह पांचवी बार है जब मनोज जारांगे आरक्षण के लिए अनशन कर रहे हैं। उनके अनुसार इस बार आरक्षण मिलने तक उनका अनशन जारी रहेगा।
मराठा नेता मनोज जारांगे पाटिल फीर अनशन पर
अभी बीते दिनों ही मराठा नेता मनोज जारांगे पाटिल ने कहा था कि, कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देने में अगर सरकार की ओर से देरी की गई तो वे फिर से 10 फरवरी से आमरण अनशन शुरू करेंगे। जारांगे पाटिल ने य़ह भी कहा कि अगर मराठा समाज को एकमुश्त कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देना शुरु नहीं हुआ तो वो ओबीसी समाज को मिल रहे 27 % आरक्षण को अब सीधा कोर्ट में चैलेंज करेंगे।
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जरांगे ने य़ह भी कहा था कि किसी के खून के रिश्ते को भी कुनबी प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण की अनुमति मिलनी चाहिए। उनके अनुसार कुनबी जाति महाराष्ट्र में OBC की श्रेणी में आती है। जरांगे ने मांग की थी कि, मराठा समुदाय के सभी लोगों को कुनबी माना जाए और उसके मुताबिक (OBC के तहत) आरक्षण दिया जाए। लेकिन शिंदे सरकार ने फैसला लिया कि, केवल निजाम युग के (कुनबी प्रमाणपत्र) दस्तावेज रखने वाले लोगों को ही इसके तहत लाभ मिलेगा। जो कि उन्हे मंजुर नही।
जानकारी हो कि , इससे पहले भी मराठा आरक्षण के लिए मनोज जारांगे पाटिल ने भूख हड़ताल शुरू की थी। इस अनशन का पहला चरण 17 दिनों तक चला था। तब उस समय सरकार ने 40 दिन का समय मांगा था। हालांकि, जारांगे पाटिल 25 अक्टूबर को फिर से भूख हड़ताल पर बैठ गए थे, उनका आरोप था कि सरकार ने दी गई अवधि के भीतर कुछ नहीं किया गया है। उनका यह उपवास 8 दिनों तक चला। उस वक्त शिंदे सरकार ने दो महीने का वक्त लिया था। लेकिन इन दो महीनों में भी सरकार ने मराठा आरक्षण के लिए कुछ नहीं किया।
