
बाघों की तस्करी का मामला (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
मुंबई: हाल ही में बाघों के शिकार में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके बाद से महाराष्ट्र का वन विभाग सतर्क हो गया है। इसलिए बाघों के शिकार को लेकर महाराष्ट्र के वन विभाग ने बाघों के शिकार से निपटने व चंद्रपुर में इस तरह की घटना के तार शिलांग से जुड़े होने का पता चलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय सहित विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया है।
अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि बाघों के अंगों की तस्करी कर उन्हें म्यांमार और अन्य देशों में भेजे जाने की घटनाएं को देखते हुए यह फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने चंद्रपुर के राजुरा वन क्षेत्र में एक बाघ के शव के साथ शिकार में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद किए गए थे। अधिकारी ने बताया कि बाघों के शिकार के मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक व्यक्ति मेघालय के शिलांग से पकड़ा गया था।
केंद्र सरकार की एजेंसी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने एक फरवरी को देश भर के बाघ अभयारण्यों के क्षेत्रीय निदेशकों को “रेड अलर्ट” जारी कर उनसे शिकार पर काबू के लिए गश्त तेज करने का आग्रह किया। महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक ने राजुरा में बाघों के शिकार मामले में बहेलिया गिरोह की कथित संलिप्तता पर चर्चा के लिए मंगलवार को यहां अधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि बाघ शिकार मामले में गिरफ्तार लोगों से गहन पूछताछ की जानी चाहिए। बैठक में शामिल मुख्य वन्यजीव संरक्षक विवेक खांडेकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “राजुरा वन क्षेत्र में बाघ शिकार मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने पाया कि तस्करी के तार शिलांग तक फैले हुए हैं। हमारा अनुभव बताता है कि बाघों की खाल और उनके शरीर के अंगों की तस्करी कभी-कभी सीमा पार म्यांमा, चीन और अन्य देशों में भी की जाती है।”
बैठक के दौरान मंत्री नाईक ने कहा कि शिकार मामले में गिरफ्तार लोगों और संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “शिकार पर काबू के लिए गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, बाघों की आवाजाही के रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए, मुखबिरों का नेटवर्क विकसित किया जाना चाहिए, संदिग्धों पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए और आवश्यक उपकरण तुरंत उपलब्ध कराए जाने चाहिए।”
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वन मंत्री ने स्थानीय समुदायों की भागीदारी का भी जिक्र किया, जो बाघों के शिकार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, “स्थानीय समुदायों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और गश्त में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए और इस प्रयास में अन्य विभागों से भी सहयोग मांगा जाना चाहिए।” वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 दिसंबर 2024 से 22 जनवरी 2025 के बीच राज्य भर में विभिन्न घटनाओं में 12 बाघों की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, पांच बाघों की मौत आपसी संघर्ष, बीमारी और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुई। आंकड़ों के अनुसार, तीन मामलों में बाघ की मौतों का कारण अवैध शिकार बताया गया। शिकार की इन घटनाओं के सिलसिले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में बाघों की आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है। वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2006 में राज्य में 103 बाघ थे जो 2010 तक बढ़कर 169 हो गए। वर्ष 2014 में बाघों की संख्या 190 और 2018 में 312 हो गई। 2022 में हुई गणना के अनुसार बाघों की कुल संख्या 444 थी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






