Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के एक और मंत्री विवादों में, विपक्ष ने लगाया आरोप, जयकुमार गोरे करेंगे मानहानि का केस
महाराष्ट्र के मंत्री इन दिनों विवादों के घेरे में है। धनंजय मुंडे ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है तो वहीं माणिकराव कोकाटे का आज कोर्ट ने राहत दे दी है। अब एक और मंत्री 'महाआफत' में फंसते नजर आ रहे हैं।
- Written By: आकाश मसने
मंत्री जयकुमार गोरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्ववाली महायुति सरकार धनंजय मुंडे व माणिकराव कोकाटे के कारण पहले ही काफी मुश्किलों का सामना कर चुकी है। हालांकि मंगलवार को मुंडे को हटाए जाने के बाद बुधवार को कोकाटे की सजा कोर्ट से स्थगित किए जाने की वजह से सरकार को थोड़ी राहत जरूर मिली थी लेकिन तभी एक और मंत्री से जुड़ा शर्मनाक मामला सामने आ गया। एक महिला की प्रताड़ना का आरोप लगने से मंत्री जयकुमार गोरे महाआफत में फंसते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री जयकुमार गोरे पर सरसेनापती हंबीरराव मोहिते के परिवार की एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगा है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद व प्रवक्ता संजय राउत ने दावा किया है कि गोरे ने पीड़ित महिला को अश्लील तस्वीरें भेजी थीं। राउत के आरोपों पर विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा है कि वह इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे।
अदालत ने बरी कर दिया है
मंत्री गोरे ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि मेरे खिलाफ 2017 में मामला दर्ज किया गया था। विधानसभा का मेरा चुनाव हुआ। उसके बाद मसवद नगरपालिका के चुनाव हुए। इसी पृष्ठभूमि में मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। यह मामला 2019 में सुलझा लिया गया है।
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भाजपा विधायक जयकुमार गोरे ने कहा कि अदालत ने मुझे बरी कर दिया है। मेरे पास फैसले की प्रति है। अदालत ने जब्त संपत्ति और मोबाइल फोन को नष्ट करने का आदेश दिया था। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में न्यायालय को सर्वोच्च माना गया है।
इस अदालती फैसले को छह साल हो गये हैं। और अब यह मामला 6 साल बाद उठाया गया है। इस पर हैरानी जताते हुए गोरे ने राजनीतिक नेताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि कब कहा और क्या बोलना चाहिए, इसकी सीमा तय होनी चाहिए।
मानहानि का दावा दायर करने की चेतावनी
गोरे ने कहा कि मेरे पिता का सात दिन पहले निधन हुआ है। उन्होंने मेरा पालन-पोषण किया, संघर्ष किया और मुझे यहां तक पहुंचाया। मुझे उनकी अस्थियों के विसर्जन की अनुमति भी नहीं दी गई। मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस हद तक राजनीति की जाएगी।
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अंततः राजनीति में सब कुछ होता रहता है। मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा कि मुझ पर आरोप लगाने वालों के खिलाफ मैं विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाऊंगा। इसके अलावा मैं मानहानि का दावा भी करूंगा।
