शनि शिंगणापुर मंदिर से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाया जाए, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की मांग उठी है। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने मुसलमान कर्मचारियों की नियुक्ति करने वालो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
- Written By: सोनाली चावरे
शनि शिंगणापुर मंदिर
अहमदनगर: महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की मांग उठी है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहे श्री शनि शिंगणापुर मंदिर के पवित्र चबूतरे पर 21 मई 2025 को मुसलमान कर्मचारियों की ओर से ग्रिल लगाने का कार्य किया गया। जिसके बाद से महाराष्ट्र मंदिर संघ ने नई मांग रखी है।
संघ का कहना है कि यह घटना अत्यंत निंदनीय और मंदिर की सात्त्विकता व धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करने वाली है। इस घटना से स्थानीय ग्रामवासियों में काफी रोष व्याप्त है। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है।
300 मुसलमान कर्मचारियों को हटाया जाए
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महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने बताया कि संबंधित मुसलमान कर्मचारियों का कार्य तत्काल रोका जाए। मंदिर में कार्यरत लगभग 300 मुसलमान कर्मचारियों को हटाया जाए और उन्हें नियुक्त करने वाले अधिकारियों की गहन जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा राज्यभर में तेज जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने क्या कहा?
घनवट ने आगे कहा, ‘शनि शिंगणापुर जैसे पवित्र देवस्थान में मांसाहारी और अन्य धर्म के लोगों को कार्य देना हिंदू समाज की आस्था और परंपरा पर सीधा आघात है। वर्तमान में लगभग 300 मुसलमान कर्मचारी देवस्थान में कार्यरत हैं, जो मंदिर की धार्मिक मर्यादा और सात्त्विकता के प्रतिकूल है। इस विषय पर महासंघ ने देवस्थान के ट्रस्टियों से संपर्क कर कार्य तत्काल रोकने की मांग की थी। ट्रस्टियों ने सूचित किया है कि काम रोक दिया गया है। फिर भी, जिन अधिकारियों ने यह आदेश दिया और मुसलमान कर्मचारियों की नियुक्ति की, उन पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
तेलंगाना स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में ऐसी ही घटना के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केवल हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। संघ का कहना है कि मंदिरों में आचार, आहार, श्रद्धा और भावना सात्त्विकता के अनुरूप होने चाहिए। पवित्र मंदिरों में इसका पालन न करने वाले अन्य धर्म के व्यक्तियों की नियुक्ति करना, मंदिर की धार्मिक शुद्धता और परंपराओं पर सीधा आघात है। राज्य सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
