

CJI Surya Kant On Maharashtra Karnataka Border Dispute: महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से 2004 के उस बहुचर्चित मुकदमे पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया है, जो दोनों राज्यों के बीच सीमा निर्धारण और भाषाई आधार पर प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा हुआ है।
यह मामला मुख्य रूप से मराठी बोलने वाली आबादी वाले 865 गांवों और कस्बों पर प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर है। वर्तमान में इन क्षेत्रों का प्रशासनिक नियंत्रण पड़ोसी राज्य कर्नाटक के पास है। इन विवादित इलाकों में बेलगावी (बेलगाम), कारवार और निपाणी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद के मामले में महाराष्ट्र के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि इस मामले में सभी जरूरी दस्तावेज और दलीलें पूरी हो चुकी हैं, इसलिए अब इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि कर्नाटक में शामिल किए गए ये 865 गांव मुख्य रूप से मराठी भाषी हैं। इन्हें महाराष्ट्र से बाहर रखना उस मूल सिद्धांत के खिलाफ है, जिसके आधार पर सन 1956 में भारत में राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वह मामले का अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं इसे सूचीबद्ध करने का पक्का वादा नहीं कर सकता।
बता दें कि मराठी भाषी 865 गांवों और कस्बों का प्रशासन कर्नाटक के पास है। इसमें बेलगावी (बेलगाम), कारवार और निपाणी जैसे इलाके शामिल हैं। महाराष्ट्र ने कर्नाटक के नियंत्रण और 1956 के कानून के प्रावधानों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक मूल मुकदमा दायर किया था।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत, भारत में भाषाई आधार पर राज्यों की सीमाएं फिर से तय की गई थीं। कन्नड़ भाषी लोगों की अधिकता के कारण बेलगावी को तत्कालीन मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में शामिल किया गया था, जबकि उससे सटे मराठी भाषी इलाके महाराष्ट्र में ही रह गए थे।
महाराष्ट्र मुख्य रूप से बेलगावी (बेलगाम), कारवार, निपानी, बीदर और भालकी सहित 865 सीमावर्ती गांवों को अपने राज्य में मिलाने की मांग करता है। महाराष्ट्र का तर्क है कि इन सभी क्षेत्रों में मराठी भाषी आबादी बहुमत में है। ऐसे में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत इन क्षेत्रों को महाराष्ट्र का हिस्सा होना चाहिए।