

Achalpur Ram Temple: अचलपुर स्थित ऐतिहासिक श्री सीतारामचंद्र संस्थान श्री राम मंदिर की लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य की 3.5 एकड़ कृषि भूमि को हड़पने की अवैध साजिश नाकाम हो गई है। अचलपुर राजस्व न्यायालय के तहसीलदार एवं कृषि भूमि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सुदर्शन शहारे ने महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और मंदिर के नए न्यासियों की प्रारंभिक आपत्ति को स्वीकार करते हुए कब्जाधारी महिला के कुलखरीदी दावे को सीधे खारिज कर दिया। किसी देवस्थान के मामले में केवल प्रारंभिक कानूनी आपत्ति के आधार पर पूरे दावे को शुरुआत में ही निरस्त करने का यह महाराष्ट्र राज्य का पहला ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।
आवेदिका महिला ने वास्तविक स्थिति छिपाकर, नवविवाचित न्यासियों को पक्षकार बनाए बिना, केवल मृत न्यासियों के विरुद्ध 24 फरवरी 2025 को कुल कानून के तहत आवेदन किया था। वर्ष 196465 में मूल कुल धन्नुसिंह ने स्वयं न्यायालय में कहा था कि वे मंदिर की भूमि नहीं खरीदना चाहते, जिसके बाद 14 अक्टूबर 1965 को यह मामला हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
पंजीकृत देवस्थान की भूमि की खरीद-बिक्री के लिए धर्मादाय आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है, जो आवेदिका के पास नहीं थी। 2 जून 2026 को पारित अंतिम आदेश में तहसीलदार ने आवेदिका का आवेदन पूरी तरह खारिज कर भूमि को संस्थान की ही संपत्ति घोषित किया। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के पदाधिकारी अनुप जायसवाल, विनीत पाखोडे और मंदिर के नए न्यासियों के इस सफल न्यायिक संघर्ष से समस्त रामभक्तों और हिंदू समाज में हर्षोल्लास का माहौल है।