लक्ष्मण हाके का मनोज जरांगे पर तीखा हमला, बोले- भीड़तंत्र के दम पर आरक्षण की मांग करना असंवैधानिक और तानाशाही
लक्ष्मण हाके ने मनोज जरांगे पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि भीड़तंत्र के दम पर (आरक्षण की) मांग करना असंवैधानिक और तानाशाही है, जिससे प्रदेश में शांति भंग होगी। मराठों और कुनबियों को एक मानना मूर्खतापूर्ण है। अगर कानून बनाने वाले लोग इन तथ्यों से अनभिज्ञ हैं तो यह खतरनाक है।
- Written By: शुभम सोनडवले
लक्ष्मण हाके और मनोज जरांगे (फोटो: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर. महाराष्ट्र में ओबीसी और मराठा आराक्षण के लिए घमासान जारी है। इस पर जमकर राजनीति भी हो रही है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल पर मराठा-ओबीसी समुदाय के बीच खाई पैदा करने की मंशा से भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया है। इसको लेकर अब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने मनोज जरांगे पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि भीड़तंत्र के दम पर (आरक्षण की) मांग करना असंवैधानिक और तानाशाही है, जिससे प्रदेश में शांति भंग होगी।
गौरतलब है कि ओबीसी के अधिकारों के लिए हाके 13 जून को जालना जिले के वाडिगोदरी गांव में भूख हड़ताल पर बैठ गये थे और कुछ दिन पहले राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
हाके और उनके समर्थक मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ देने के लिए कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की जरांगे की मांग का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि राज्य सरकार को ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए जिससे ओबीसी प्रभावित हों।
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कुनबियों को एक मानना मूर्खतापूर्ण
जालना के एक अस्पताल से संवाददाताओं से बात करते हुए हाके ने कहा, “उनकी (जरांगे की) मांगें तानाशाही हैं और इससे महाराष्ट्र की शांति भंग होगी। भीड़तंत्र के दम पर (आरक्षण की) मांग करना असंवैधानिक और तानाशाही है। एक फैसले में कहा गया है कि मराठों और कुनबियों को एक मानना मूर्खतापूर्ण है।” उन्होंने कहा, “निर्वाचित प्रतिनिधियों को न्यायालय के फैसले अवश्य पढ़ने चाहिए। अगर कानून बनाने वाले लोग इन तथ्यों से अनभिज्ञ हैं तो यह खतरनाक है।”
महाराष्ट्र की शांति भंग करना चाहते हैं भुजबल
मनोज जरांगे ने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता एवं राज्य सरकार के मंत्री छगन भुजबल प्रदेश की शांति भंग करना चाहते हैं। इस पर हाके ने कहा कि आरक्षण कार्यकर्ता कुछ भी बोल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान समर्थकों का मनोबल बढ़ाने के लिए है, और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। (एजेंसी एडिटेट)
