

शरद पूर्णिमा पर महाराष्ट्र में दूध की खपत अचानक बढ़ जाती है।
खुले आसमान के नीचे मसाला दूध रखने की प्राचीन परंपरा है।
त्योहार के इस विशेष अवसर पर रिकॉर्डतोड़ दूध की बिक्री होती है।
Maharashtra Dairy Market Festival Demand: आम तौर पर जिस घरेलू इस्तेमाल के लिए हर घर में रोजाना आधा या एक लीटर दूध से काम चल जाता है जिससे दिन भर में चाय बनाने जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती हैं, पर कोजागिरी पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाराष्ट्र में दूध की खपत में अचानक अप्रत्याशित उछाल आ जाता है।
इस विशेष दिन राज्य के लगभग हर घर में बड़े-बड़े बर्तनों में भारी मात्रा में दूध उबाला जाता है। अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।
कोजागिरी पूर्णिमा की रात महाराष्ट्र में दूध को केवल उबाला ही नहीं जाता, बल्कि इसमें काजू, बादाम, पिस्ता, चारोली, इलायची, दालचीनी और केसर मिलाकर स्वादिष्ट मसाला दूध तैयार किया जाता है। रात के समय इस मसाला दूध को खुले आसमान के नीचे चंद्रप्रकाश में रखा जाता है।
धार्मिक और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और उसकी किरणों से स्वास्थ्यवर्धक व अमृततुल्य गुण बरसते हैं। खुले चंद्रप्रकाश में रखे जाने से दूध में ये औषधीय गुण अवशोषित हो जाते हैं, जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस रात लक्ष्मी पूजन और रात्रि जागरण का विधान है। साथ ही, शरद ऋतु के आगमन और बदलते मौसम में शरीर को ताकत, कैल्शियम और उष्णता प्रदान करने के लिए मसाला दूध पीने की यह प्राचीन परंपरा चली आ रही है।
कोजागिरी पूर्णिमा के दिन पूरे महाराष्ट्र राज्य में दूध की मांग कई गुना बढ़ जाती है। गृहनिर्माण सोसायटियों, सार्वजनिक मंडलों, युवाओं के समूहों और होटल मैफिलों में दूध उबालने के बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कोल्हापुर (गोकुल रिकॉर्ड): 2025 में कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) ने कोजागिरी पूर्णिमा के अवसर पर 20 लाख 28 हजार 526 लीटर दूध की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जो कि 2024 की तुलना में 1.63 लाख लीटर से भी अधिक है।
छत्रपति संभाजीनगर: यहां 2025 में एक ही दिन में करीब 4 लाख लीटर दूध की बिक्री हुई, जिसमें सामान्य दैनिक बिक्री (2.5 लाख लीटर) के मुकाबले 2 लाख लीटर का अतिरिक्त उछाल देखा गया था। यहां लगभग 2 करोड़ रुपये के दूध और 15 लाख रुपये के दूध-मसाले (300–350 किलो) का कारोबार हुआ था।
नासिक शहर: नासिक में 2025 में कोजागिरी के कारण दूध की दैनिक मांग में 10 हजार लीटर से अधिक की वृद्धि हुई थी और कुल बिक्री 8 लाख लीटर तक पहुंच गई थी।
अचानक बढ़ी भारी मांग और त्योहारों के सीजन में मिठाई निर्माताओं द्वारा की जाने वाली अतिरिक्त खरीदारी के कारण हर वर्ष इस दिन दूध के दामों में जबरदस्त तेजी देखी जाती है ।
नासिक जिले में दूध की कीमतों में प्रति लीटर 40 से 50 रुपये तक का उछाल देखी जाती है। आम दिनों में 80 रुपये लीटर मिलने वाला भैंस का दूध बढ़कर 120 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है, जबकि गाय का दूध 45 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर तक पहुचता है।
भिवंडी और नासिक के स्थानीय खुदरा बाजारों में पिछले वर्ष खुले दूध के दाम 100 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर गए थे। इसके अलावा, बाजार में दूध मसाले का भाव होलसेल में ₹3,300 प्रति किलो और खुदरा में ₹3,700 से ₹3,800 प्रति किलो तक दर्ज किया गया था।
इस प्रकार, कोजागिरी पूर्णिमा का यह पावन पर्व महाराष्ट्र में सांस्कृतिक आस्था, स्वास्थ्य परंपरा और डेयरी कारोबार के विशाल आर्थिक टर्नओवर का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।