Jalna Water Crisis 2026: जालना में भीषण जल संकट, 36% रह गया जल भंडार, 17 टैंकरों से बुझ रही प्यास

Jalna Water Crisis News: जालना जिले में गर्मी के साथ पेयजल संकट गहरा गया है। जिला प्रशासन ने 17 टैंकरों के जरिए जलापूर्ति शुरू की है और 16.42 करोड़ रुपये की राहत योजना को मंजूरी दी है।
Jalna Water Crisis 2026: Severe Water Crisis in Jalna Water Reserves Drop to 36%; 17 Tankers Quenching Thirst
जालना में जल संकट की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Jalna Water Scarcity: जालना जिले में बढ़ते तापमान के साथ ही जल संकट की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके कारण अधिकांश कुएं और प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं। वर्तमान में जिले के प्रमुख जल भंडारों में केवल 36 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है। इस कमी के कारण कई गांवों में पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है और नागरिकों को पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

6 प्रमुख गांवों और 9 छोटी बस्तियों में पानी की भारी किल्लत

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में जिले के 6 प्रमुख गांवों और 9 छोटी बस्तियों में पानी की भारी किल्लत (Water Crisis) है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए 17 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू कर दी है। जिन क्षेत्रों में पानी के पारंपरिक स्रोत पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर 13 निजी कुओं का अधिग्रहण किया गया है। इन कुओं से पानी भरकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है।

जल संकट निवारण के लिए 16.42 करोड़ रुपये की योजना

जिले में संभावित सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने दूरगामी कदम उठाए हैं। प्रशासन का अनुमान है कि जिले के करीब 561 गांवों और 140 बस्तियों में आने वाले समय में जल संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए जनवरी से जून 2026 तक की अवधि के लिए 16.42 करोड़ रुपये की जल संकट निवारण योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।

3.70 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान

इस स्वीकृत बजट का एक बड़ा हिस्सा जलापूर्ति सुनिश्चित करने में खर्च किया जाएगा। योजना के तहत टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जिले में जो सरकारी जल योजनाएं तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं या जिन्हें मरम्मत की आवश्यकता है, उनके लिए 3.70 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर आपूर्ति बहाल की जा सके।

बदनापुर और जाफराबाद में स्थिति सबसे अधिक गंभीर

जिले के भीतर बदनापुर और जाफराबाद तहसील के क्षेत्रों में जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। बदनापुर क्षेत्र के 6 गांवों और 9 बस्तियों की प्यास बुझाने के लिए अकेले 11 टैंकर तैनात किए गए हैं। वहीं, जाफराबाद क्षेत्र के 2 गांवों में स्थिति को संभालने के लिए 6 निजी टैंकरों की सहायता ली जा रही है। 'स्टीलनगरी' के रूप में प्रसिद्ध जालना जिले में कुल 17 टैंकर फिलहाल सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

प्रशासन की निगरानी और ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलें

जालना जिला प्रशासन स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि टैंकरों के वितरण में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। हालांकि, कई सुदूर ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। निजी कुओं का अधिग्रहण एक अस्थाई समाधान है, लेकिन भूजल स्तर का गिरना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पानी का अपव्यय रोकने की अपील

प्रशासन ने नागरिकों से भी पानी का अपव्यय रोकने की अपील की है। आने वाले दिनों में और अधिक गांवों को टैंकरों की सूची में शामिल किया जा सकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि मानसून समय पर नहीं आता है, तो जिले को एक भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जिला कलेक्टर कार्यालय की टीम लगातार तहसील स्तर के अधिकारियों से संपर्क में है ताकि राहत कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।

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