जालना में रेत माफिया से सेटिंग पड़ी भारी, रिश्वत लेते पुलिस इंस्पेक्टर और कांस्टेबल गिरफ्तार

Jalna Police Bribery Case: जालना के मंठा पुलिस स्टेशन में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। रेत से भरे ट्रक को छोड़ने के बदले 50 हजार की रिश्वत मांगते दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।
Jalna Police Inspector and Constable Arrested on Charges of Accepting 50,000 Bribe in Sand Truck Case
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
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Jalna Corruption News: महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की मुहिम तेज हो गई है, लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला जालना जिले के मंठा पुलिस स्टेशन से सामने आया है, जहां कानून के रखवालों ने ही कानून की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की। यहां एक पुलिस निरीक्षक (PI) और एक पुलिस कर्मचारी को रेत से भरे ट्रक पर कार्रवाई न करने के एवज में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, मंठा पुलिस स्टेशन की टीम ने अवैध रेत से भरा एक ट्रक जब्त किया था। इस ट्रक पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय, उसे छोड़ने के लिए पुलिस महकमे के अधिकारियों ने सौदेबाजी शुरू कर दी। पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार राठौड़ और पुलिस कर्मचारी रवि जाधव ने ट्रक मालिक से कार्रवाई न करने के बदले 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।

ACB ने बिछाया जाल

ट्रक मालिक रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, इसलिए उसने तुरंत इस मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, एसीबी की टीम ने तथ्यों की पुष्टि की और जालना पुलिस स्टेशन के पास जाल बिछाया।

जैसे ही शिकायतकर्ता रिश्वत की राशि लेकर पहुंचा, योजना के अनुसार एसीबी की टीम ने छापा मारा। पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार राठौड़ और उनके सहयोगी रवि जाधव को शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

जालना एसीबी ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल थे। महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से अधिकारियों द्वारा अपराधियों को बचाने या अपराध छिपाने के नाम पर वसूली के मामले बढ़े हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन अब और भी सख्त नजर आ रहा है।

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