जालना की ‘नवनगर’ परियोजना 15 साल से अधर में, मुआवजा मिला; लेकिन शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य
Jalna CIDCO Navnagar Project: जालना में सिडको की प्रस्तावित ‘नवनगर’ आवासीय परियोजना 15 वर्षों से अटकी हुई है। कई बार स्थान बदलने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
- Written By: अंकिता पटेल
Maharashtra Housing Development Delay ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Housing Development Delay: जालना जिले में गत 15 वर्षों से सिडको की प्रस्तावित आवासीय ‘नवनगर’ परियोजना अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। कई बार स्थान बदलने व सर्वे के बावजूद यह परियोजना अभी तक जमीन पर शुरू नहीं हो सकी है।
अब तीसरी बार तहसील के खरपुड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना के भी अटकने के आसार है। उक्त परियोजना के लिए कुछ किसानों की जमीन अधिग्रहीत कर उन्हें करोड़ों रुपये का मुआवजा दिए एक वर्ष बीत चुका है, पर मौके पर अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
पूर्व पालक मंत्री राजेश टोपे के पास नगर विकास विभाग का कार्यभार था, तब सबसे पहले इस परियोजना को खासगांव क्षेत्र में मंजूरी दी गई थी। उस समय किसानों की जमीन भी अध्धिसाहीत की गई थी।
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बाद में प्रदूषण से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए परियोजना रोक दी गई। तदुपरांत पूर्व पालक मंत्री बबनराव लोणीकर के कार्यकाल में परियोजना को निधाना क्षेत्र में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई व प्रारूप बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई। वहां भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
खरपुड़ी क्षेत्र तीसरा प्रस्तावित स्थान
वर्ष 2018 में सिडको प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘ईवाई (Ernst & Young) के जरिए खरपुडी व आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कराने के वर्ष 2023 में परियोजना की पुनः समीक्षा की गई, यही नहीं, इसके लिए केपीएमजी कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई गई, जिसे खरपुडी क्षेत्र को परियोजना के लिए उपयुक्त बताया गया। इसके आधार पर 247 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करने का निर्णय लिया गया, जिसमें 50 भूमि खड़ (गट नंबर) शामिल है।
ग्रीन जोन का मुद्दा बना बाधा
परियोजना क्षेत्र में येलो व ग्रीन जोन से जुड़े भूमि उपयोग के मुद्दे सामने आने के बाद प्रक्रिया एक बार फिर धीमी पड़ गई है। सिडको प्रशासन ने परियोजना के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरी से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने निविदा भी जारी की थी, पर इसमें किस एजेंसी ने रुचि दिखाई, इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
300 करोड़ का मिला मुआवजा
बार-बार स्थान बदलने व सर्वे के बावजूद परियोजना का धरातल पर नहीं उतरना राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। परियोजना के तहत गत वर्ष 26 से अधिक किसानों की जमीन अधिग्रहीत कर उन्हें 300 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी क्षेत्र में परियोजना से संबंधित कोई ठोस गतिविधि शुरू नहीं हुई है। इससे किसानों व स्थानीय प्रशासन के बीच अनिश्चितता व असमंजस की स्थिति है।
सर्वे के बावजूद धरातल पर नहीं
बार-बार स्थान बदलने व सर्वे के बावजूद परियोजना का धरातल पर नहीं उतरना राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
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अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ प्रमुख नेता परियोजना को लेकर क्या ठोस निर्णय लेते हैं।
क्या प्रस्तावित सिडको नवनगर परियोजना वास्तविक रूप ले पाएगी या कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
