शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत, कांग्रेस नेता की याचिका खारिज; विधायकी बरकरार
Arjun Khotkar News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर की जीत को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता कैलाश गोरंट्याल की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने लाभ के पद के आरोपों को निराधार बताया।
- Written By: आकाश मसने
शिवसेना विधायक अर्जून खोतकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court On Arjun Khotkar Win: महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने जालना विधानसभा क्षेत्र से शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक अर्जुन खोतकर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी जीत को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता कैलाश गोरंट्याल की चुनाव याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति किशोर सी. संत की एकल पीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में कोई पुख्ता तथ्य मौजूद नहीं हैं।
क्या था पूरा मामला?
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जालना सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। इस चुनाव में अर्जुन खोतकर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता कैलाश गोरंट्याल को लगभग 31,000 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। अपनी हार के बाद गोरंट्याल ने चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारी को पक्षकार बनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने खोतकर के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की थी।
याचिका में लगाए गए आरोप
कैलाश गोरंट्याल ने अपनी याचिका में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी।
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लाभ का पद: याचिकाकर्ता का दावा था कि नामांकन दाखिल करते समय खोतकर जालना कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के अध्यक्ष थे। कांग्रेस नेता के अनुसार, यह पद ‘लाभ के पद’ की श्रेणी में आता है, जिससे खोतकर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे।
हलफनामे में त्रुटि: उन्होंने यह भी दलील दी कि खोतकर द्वारा प्रस्तुत चुनावी हलफनामा चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप में नहीं था और उसमें कई जानकारियां अधूरी थीं।
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कोर्ट का फैसला और कानूनी तर्क
अर्जुन खोतकर की ओर से अधिवक्ता एस. बी. देशपांडे ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह पाया कि APMC अध्यक्ष का पद धारण करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191 के तहत अयोग्यता के दायरे में नहीं आता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित तौर पर जानकारी छिपाना या हलफनामे का प्रारूप कोई ऐसा ‘महत्वपूर्ण तथ्य’ नहीं है जिसके आधार पर लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधि का चुनाव रद्द किया जाए। इस फैसले के बाद जालना में शिवसेना कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
