

Rohini Khadse vs PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को वैश्विक परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का हवाला देते हुए देशवासियों से सोने की खरीद कम करने, पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने और 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे विकल्पों को अपनाने की अपील की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जलगांव की कद्दावर नेता रोहिणी खड़से ने केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि जब पांच राज्यों में भाजपा के रोड शो और रैलियां चल रही थीं, तब क्या यह संकट नहीं दिख रहा था?
रोहिणी खड़से ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर वाकई देश को आर्थिक सीमाओं की जरूरत है, तो इसकी शुरुआत सत्ता के गलियारों से होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रियों के लिए इस्तेमाल होने वाले वीआईपी काफिलों को बंद कर उन्हें सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करनी चाहिए। खड़से ने यह भी कहा कि विज्ञापनों पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये और विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए इस्तेमाल होने वाले धन पर लगाम लगाना ज्यादा जरूरी है, न कि आम जनता की छोटी-छोटी जरूरतों पर पाबंदी लगाना।
दूसरी ओर, विधायक रोहित पवार ने पीएम की सलाह को सही बताते हुए इसकी दिशा भाजपा शासित राज्यों की ओर मोड़ दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार में अनावश्यक वाहनों का बेड़ा खरीदा जा रहा है और अध्ययन के नाम पर विदेश यात्राएं की जा रही हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार और बड़े ठेकेदारों से रिश्वत लेने के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि अगर सरकार इन पर रोक लगा दे, तो शायद जनता को मितव्ययी बनने की नौबत ही न आए।
रोहित पवार ने आशंका जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी का संकेत हो सकती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही अब जनता पर बोझ डालने की तैयारी शुरू हो गई है। विपक्ष का तर्क है कि भाजपा सरकार चुनाव के दौरान मितव्ययिता की बात नहीं करती, लेकिन जैसे ही वोटिंग समाप्त होती है, देश को 'संकट' और 'युद्ध' के बहाने अनुशासन सिखाया जाने लगता है।
विपक्षी नेताओं ने एक सुर में कहा कि केंद्र को 'रुपये के मूल्य' और 'ईंधन की बचत' पर भाषण देने से पहले अपनी चुनावी रणनीतियों में खर्च होने वाले काले धन और निजी जेट के उपयोग पर आत्ममंथन करना चाहिए। रोहिणी खड़से के अनुसार, "जो आप खुद नहीं कर सकते, वह जनता से करने की उम्मीद करना बेमानी है।" अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री की इस अपील का जनता पर क्या असर होता है और भाजपा विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।