एसटी बस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Public Transport Grievances: जलगांव में जर्जर बसें, टूटी सीटें और बस स्टैंडों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव यात्रियों के गुस्से को और हवा दे रहा है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल (ST) ने गर्मी की छुट्टियों का फायदा उठाते हुए किरायों में 10% की भारी बढ़ोतरी कर दी है। 14 अप्रैल की मध्यरात्रि से लागू हुई यह नई दरें अगले दो महीनों तक प्रभावी रहेंगी। हालांकि, किराए में इस वृद्धि ने यात्रियों की जेब पर बोझ तो बढ़ा दिया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल निराशा ही हाथ लग रही है।
किराया वृद्धि के बीच एसटी प्रशासन की संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। धुलिया से जलगांव जा रही अमरावती डिपो की एक बस में यूपीआई (UPI) सिस्टम बंद होने के कारण एक कॉलेज छात्रा को भारी अपमान का सामना करना पड़ा। छात्रा के पास नकद पैसे नहीं थे और उसने ऑनलाइन भुगतान का अनुरोध किया, जिसे कंडक्टर ने सिरे से खारिज कर दिया। मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखते हुए कंडक्टर ने छात्रा को बीच रास्ते में ही बस से उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
जब बस में विवाद बढ़ रहा था, तब वहाँ मौजूद एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने छात्रा की असहाय स्थिति को देखते हुए अपने पास से नकद भुगतान कर उसका टिकट कटवाया। छात्रा ने बाद में उन्हें डिजिटल माध्यम से पैसे लौटाने की कोशिश की, जिसे अधिकारी ने बड़े दिल से मना कर दिया। इस घटना ने जहाँ एक ओर व्यक्तिगत स्तर पर मानवता की मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर एसटी महामंडल की तकनीकी विफलता और कर्मचारियों के अड़ियल रवैये पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रियों का आरोप है कि एसटी की बसें अब सफर के लायक नहीं बची हैं। खिड़कियां जाम हैं, सफाई का नामोनिशान नहीं है और बसें अक्सर बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। बस स्टैंडों पर पीने के पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने के बावजूद 10% अतिरिक्त किराया वसूलना यात्रियों के साथ अन्याय है। इसके अलावा, अधिस्वीकृत पत्रकारों को भी अब ‘स्वच्छता कर’ के नाम पर अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ रहा है, जिससे हर वर्ग में महामंडल के प्रति नाराजगी व्याप्त है।
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यात्रियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि महामंडल को केवल राजस्व बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय अपनी सेवाओं को आधुनिक और विश्वसनीय बनाना चाहिए। यदि प्रशासन ‘डिजिटल भुगतान‘ को बढ़ावा देने का दावा करता है, तो बसों में यूपीआई सिस्टम का खराब होना और उसके बदले यात्रियों को प्रताड़ित करना कतई स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल स्थिति यह है कि यात्रियों का सफर महंगा और मानसिक तनाव से भरा होता जा रहा है।