जलगांव मनपा में कचरा ठेके को लेकर नया विवाद, 'सीक्रेट मीटिंग' से मचा हड़कंप; गरमाई राजनीति

Jalgaon Urban Waste Management: जलगांव में कचरा संकलन को लेकर कथित 'सीक्रेट मीटिंग' ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। बीवीजी कंपनी और सत्ताधारी दल के नेताओं की बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
New Controversy Over Waste Management Contract at Jalgaon Municipal Corporation; 'Secret Meeting' Sparks Uproar, Heats Up Politics
Jalgaon Municipal Corporation Waste Controversy ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Jalgaon Municipal Corporation Waste Controversy: जलगांव शहर की साफ-सफाई हो न हो, लेकिन कचरे के नाम पर अपनी जेबें गरम करने का 'गंदा खेल' जलगांव महानगरपालिका में बदस्तूर जारी है। 13 मार्च की शाम रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक आलीशान होटल में सत्ताधारी दल के दिग्गजों और कचरा संकलन करने वाली 'बीवीजी' (BVG) कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक 'सीक्रेट मीटिंग' ने शहर के गलियारों में सनसनी मचा दी है।

सूत्रों की मानें तो इस बंद कमरे की बैठक में शहर की स्वच्छता पर नहीं, बल्कि कचरे से निकलने वाली 'मलाई' के बंटवारे को लेकर जमकर जूतम-पैजार हुई है।

शुक्रवार की शाम जब शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही थी, तब सत्ता के गलियारों के 'ठेकेदार' स्टेशन रोड के एक होटल में कचरा कंपनी पर दबाव बनाने में मशगूल थे।

गोपनीय बैठक पर उठने लगे सवाल, प्रशासन चुप

इस गोपनीय बैठक को लेकर जब अधिकृत जानकारी जुटाने की कोशिश की गई, तो सत्ताधारियों ने चुप्पी साध ली, लेकिन मनपा प्रशासन के भीतर इस 'होटल कांड' की चर्चा जोरों पर है। एक तरफ शहर कचरे से अटा पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के पार्षद और पदाधिकारी जनता के पैसों पर डकैती डालने की जुगत में भिड़े हैं, इस तरह की कानाफूसी चौराहों पर सुनवाई दे रही है।

ठेकेदारों को डरा-धमकाकर जमकर वसूली की कोशिश

खबर है कि बैठक में कचरा संकलन के आंकड़ों को लेकर पहले तो बवाल हुआ और फिर शुरू हुआ 'कमीशन का बंदरबांट' हर पदाधिकारी कंपनी को अपने इशारों पर नवाने और अपना हिस्सा फिक्स करने की होड़ में दिखाई दिया, चर्चा तो यहां तक है कि मलाई के कम-ज्यादा होने पर सत्ताधारियों के बीच ही तीखी नोकझोंक हो गई जलगांव मनपा का इतिहास गवाह है कि यहां कचरा संकलन का ठेका हमेशा से विवादों और भ्रष्टाचार की भेट चढ़ता रहा है।

हर कार्यकाल में ठेकेदार को डरा-धमकाकर वसूली करने की परंपरा रही है। व्या 13 मार्च की यह गुप्त बैठक उसी हफ्ता वसूली की कड़ी का हिस्सा थी? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि नगर निगम के दफ्तर को छोड़कर होटल के बंद कमरों में कंपनी के साथ डील करनी पड़ीं? यह सवाल अब शहर की जनता पूछ रही है।

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