अहिल्यानगर नगर निगम में अनुशासन की सख्ती, 41 लेट लतीफ़ कर्मचारियों को मेयर ने लगाई कड़ी फटकार

Ahilyanagar Municipal Employees Inspection: अहिल्यानगर में मेयर ज्योतिताई गाडे ने नगर निगम मुख्यालय के गेट पर निरीक्षण अभियान चलाकर देर से आने वाले 41 कर्मचारियों को फटकार लगाई।
महाराष्ट्र नगर निगम खबर, Ahilyanagar Municipal Corporation
civic administration inspection (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Ahilyanagar Municipal Corporation: मेयर ज्योतिताई गाडे सोमवार सुबह नगर निगम प्रशासनिक भवन के प्रवेश द्वार पर खुद खड़ी रहीं और देर से आने वाले कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। इस निरीक्षण अभियान में पाया गया कि करीब 150 कर्मचारियों में से 41 कर्मचारी तय समय के बाद कार्यालय पहुंचे थे। मेयर ने चेतावनी दी कि आगे से देर से आने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

6 फरवरी को मेयर पद संभालने के बाद ज्योतिताई गाडे ने प्रशासनिक बैठक आयोजित कर सभी कर्मचारियों को समय पर कार्यालय आने, पहचान पत्र पहनने और नागरिकों के काम ईमानदारी से करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, शिकायतें मिल रही थीं कि कई कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसी के चलते मेयर ने स्वयं निरीक्षण अभियान चलाने का फैसला किया।

लोगों में अधिकारियों के प्रति नाराजगी

सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे मेयर अपने निजी सहायक श्रीधर देशपांडे के साथ नगर निगम मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर पहुंचीं। वहां खड़े होकर उन्होंने कार्यालय में आने वाले कर्मचारियों की निगरानी की। इस दौरान करीब 41 कर्मचारी देर से आते हुए पाए गए। नगर निगम में कर्मचारियों के देर से आने के कारण नागरिकों के काम समय पर नहीं हो पाते हैं और उन्हें बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे लोगों में अधिकारियों के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।

मेयर ज्योतिताई गाडे ने कहा, “अब देर से आने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे, लेकिन काम में लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि देर से आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विभागाध्यक्षों की भूमिका पर उठे सवाल

नगर निगम में समय पर कार्यालय न पहुंचना कई कर्मचारियों की आदत बन गई है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि मेयर आज प्रवेश द्वार पर अधिक समय तक खड़ी रहतीं, तो देर से आने वाले कर्मचारियों की संख्या और बढ़ सकती थी। इस बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि विभागाध्यक्ष और स्थापना विभाग देर से आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।

नगर निगम मुख्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली होने के बावजूद यदि कर्मचारियों का समय दर्ज होता है, तो उस आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। माना जा रहा है कि यदि मेयर ज्योतिताई गाडे कर्मचारियों के साथ-साथ विभागाध्यक्षों और स्थापना विभाग से भी जवाब मांगती हैं, तो इस समस्या का समाधान संभव हो सकता है।

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