

Jalgaon Tissue Culture Banana Plants: जलगांव केले की खेती में अब टिश्यूकल्चर तकनीक से दो नई उन्नत किस्मों के पौधे तैयार होंगे, जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र, त्रिची के बीच यह ऐतिहासिक समझौता हुआ।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में जलगांव के जैन हिल्स पर करार पर हस्ताक्षर किए गए। ये दोनों किस्में 'कावेरी वामन' और 'कावेरी पूवन' हैं। अब जैन इरिगेशन जलगांव में ही इनके टिश्यूकल्वर पौधे तैयार कर किसानों तक पहुंचाएगी।
दोनों किस्मों में ऐसी खूबिया है जो केला उत्पादकों की बड़ी समस्याओं का समाधान करेंगी, कावेरी वामन किस्म के पौधे की ऊंचाई मात्र 150 से 160 सेंटीमीटर होती है, जिससे यह आधी-तूफान में नहीं गिरती है।
इसके घड़े का वजन 18 से 25 किलोग्राम तक होता है और प्रति हेक्टेयर 55 से 60 टन उत्पादन मिलता है। सधन खेती से 10 प्रतिशत खर्च की बचत होती है और इसे साल में कभी भी लगाया जा सकता है।
कावेरी पूवन किस्म पयूजेरियम विल्ट (मर रोग) टीआर-1, टीआर-4 जैसे जानलेवा रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है। यह स्थानीय पूवन किस्म की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक उत्पादन देती है और खारी क्षारीय जमीन में भी बंपर पैदावार सुनिश्चित करती है।
समझौते पर राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन और जैन इरिगेशन के डॉ. अनिल पाटील व डॉ. के. बी. पाटील ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कंपनी के अध्यक्ष अशोक जैन, प्रबंध निदेशक अनिल जैन, सह-प्रबंध निदेशक अजित जैन व अतुल जैन मौजूद रहे।
कवयित्री बहिणाबाई चौधरी विश्वविद्यालय में आयोजित केला सगोष्दी के दौरान करार की प्रतियों का आदान-प्रदान किया गया। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री रक्षा खडसे, जलसंपदा मंत्री गिरीष महाजन, सांसद स्मिता वाघ, केंद्रीय कृषि सचिव प्रियरंजन दास, उद्यानिकी निदेशक अंकुश माने, आईसीएआर के डॉ. व्ही. बी. पटेल और जिलाधिकारी रोहन घुगे समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।