मौत से मुकाबला: जलगांव के 14 वर्षीय ओम की बहादुरी, अनेर नदी में कूदकर बचाई 4 बच्चों की जान

Rescue Incident Maharashtra: जलगांव के 14 वर्षीय ओम पाटिल ने अनेर नदी में डूब रहे 4 बच्चों की जान बचाकर बहादुरी की मिसाल पेश की। जैन इरिगेशन ने उसके साहस को देखते हुए पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान किया।
Facing Death: The Bravery of 14-Year-Old Om from Jalgaon—Saved the Lives of 4 Children by Jumping into the Aner River
Jalgaon Child Rescue Story( Source: Social Media )
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Jalgaon Child Rescue Story: जलगांव तैरना पूरी तरह नहीं आता था, लेकिन जब आंखों के सामने 4 मासूमों की जान खतरे में दिखी, तो 14 साल के ओम ने मौत से खेलने में देर नहीं लगाई। ओम रवींद्र पाटिल ने उस दिन न सिर्फ 4 बच्चों की जान बचाई, बल्कि सच्ची वीरता की मिसाल पेश कर दी।

अब इस अदम्य साहस को जैन इरिगेशन ने सलाम किया है। जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड और भवरलाल एंड कांताबाई जैन फाउंडेशन ने ओम के साहस का सम्मान करते हुए न केवल उसकी, बल्कि उसके बड़े भाई की भी पूरी पढ़ाई का खर्च वहन करने का ऐलान किया है।

यह महत्वपूर्ण फैसला 25 मार्च को जैन हिल्स में आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में लिया गया। घटना कुछ दिनों पहले की है, जब चोपडा तहसील के गणपुर गांव में अनेर नदी में 4 अल्पवयस्क बच्चे (उम्र करीब 16 साल) नहाने उतरे थे।

उन्हें ठीक से तैरना नहीं आता था और वे अचानक गहरे पानी में डूबने लगे। उनकी चीख सुनकर आठवीं क्लास में पढ़ने वाले ओम ने बिना किसी डर के नदी में छलांग लगा दी। अपनी जान की परवाह किए बिना उसने एक-एक करके चारों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस जांबाजी की चर्चा पूरे जिले में हो रही थी।

सम्मान समारोह में बढ़ाई गई परिवार की मदद

शुरुआत में फाउंडेशन ने केवल ओम की शिक्षा का खर्च उठाने का निर्णय लिया था। 25 मार्च को जब ओम और उसके परिवार को जैन हिल्स आमंत्रित किया गया, तो वहां का माहौल भावुक हो गया। जैन इरिगेशन के अध्यक्ष अशोक जैन ने ओम के पिता रवींद्र पाटिल और माता सरलाबाई का विशेष सम्मान किया।

मजदूरी कर रहें माता-पिता की चिंता हुई दूर इस दौरान एडवोकेट बालकृष्ण

पाटिल और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। अशोक जैन ने ओम की सराहना करते हुए कहा, "ओम का साहस अद्भुत है, लेकिन उससे भी बड़े उसके संस्कार हैं।"

इसी गरिमामयी अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि ओम के बड़े भाई दिवेश (ग्यारहवीं क्लास) की आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च भी अब फाउंडेशन ही वहन करेगा, ओम के माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

बच्चों को उच्च शिक्षा को लेकर वे हमेशा चिंतित रहते थे, लेकिन अब जैन ग्रुप की इस पहल से उनके भविष्य की राह आसान हो गई है। नवनियुक्त 'बाल वीर' ओम ने इस सहयोग के लिए जैन फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया है।

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