यूपी में 120 तो बिहार में 60...महाराष्ट्र के सांसदों की भी बढ़ेंगी संख्या! परिसीमन से बदलेगा सत्ता का समीकरण?

Delimitation Commission India 2026: भारत में परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 816 होने का अनुमान। महाराष्ट्र में होंगे 72 सांसद। महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित। दक्षिण बनाम उत्तर भारत की सियासी जंग तेज।
India's Lok Sabha seats may increase to 816 after delimitation. Maharashtra to get 72 seats. 273 seats reserved for women. South India flags concerns over population-based census.
लोकसभा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Lok Sabha Seats After Delimitation: संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून लंबे समय से रुका हुआ है। सरकार को उम्मीद है कि वह 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू कर देगी। सूत्रों के अनुसार विपक्षी दलों के साथ बातचीत चल रही है और यदि आवश्यक हुआ, तो सरकार इस मौजूदा संसदीय सत्र के दौरान इसके लिए एक संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी।

संविधान संशोधन विधेयक के अलावा सरकार एक परिसीमन आयोग गठित करने के लिए एक दूसरे विधेयक पर भी काम कर रही है। बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इन दोनों विधेयकों को मंजूरी मिलने की संभावना है। अब तक देश में चार बार परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं और इनके आधार पर लोकसभा की सीटें भी बढ़ाई जा चुकी हैं।

इस बार दक्षिण बनाम उत्तर की लड़ाई के मद्देनजर कह सकते हैं कि संविधान निर्माताओं ने शायद ही इस बात की कल्पना की होगी कि भविष्य में परिसीमन को लेकर भी विवाद होगा और यह देश में विभाजन का हथियार बन सकता है। परिसीमन के बाद मौजूदा 543 सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती है, जिनमें से 33 फीसद यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।

दक्षिणी राज्य कर रहे हैं विरोध

तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कुछ राज्य परिसीमन का विरोध कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या तय की जाएगी, तो उनको नुकसान होगा क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू किया है। उनका मानना है कि एक तरह से यह अच्छे काम के लिए दंडित करने के समान होगा। दूसरी तरफ उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है और इन राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर फायदा होगा।

क्रमांक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वर्तमान सीटें परिसीमन बाद
1 दमन दीव 1 1
2 जम्मू-कश्मीर 5 8
3 लद्दाख 1 1
4 पंजाब 13 20
5 छत्तीसगढ़ 11 17
6 हरियाणा 10 15
7 बिहार 40 60
8 राजस्थान 25 38
9 हिमाचल प्रदेश 4 6
10 गुजरात 26 39
11 उत्तराखंड 5 8
12 महाराष्ट्र 48 72
13 उत्तर प्रदेश 80 120
14 दादर-नगर हवेली 1 1
15 अरुणाचल प्रदेश 2 3
16 गोवा 2 3
17 नगालैंड 1 2
18 कर्नाटक 28 42
19 मणिपुर 2 3
20 केरल 20 30
21 मिजोरम 1 2
22 लक्षद्वीप 1 1
23 त्रिपुरा 1 2
24 तमिलनाडु 39 59
25 मेघालय 2 3
26 आंध्र प्रदेश 25 38
27 असम 14 21
28 तेलंगाना 17 26
29 सिक्किम 1 2
30 चंडीगढ़ 1 1
31 पश्चिम बंगाल 42 63
32 मध्य प्रदेश 14 21
33 ओडिशा 21 32
34 पुडुचेरी 1 1
35 झारखंड 14 21
36 अंडमान-निकोबार द्वीप 1 1
37 दिल्ली 7 11

अब तक चार बार हुआ परिसीमन

अब तक भारत में चार बार क्रमशः 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन हुआ है। साल 1976 तक प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटें नए सिरे से तय की जातीं थीं।

1976 में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार ने सीटों का आवंटन इसलिए फ्रीज कर दिया कि परिवार नियोजन की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू करने वाले राज्यों को प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर नुकसान न हो। इस फैसले को 42वें संविधान संशोधन के जरिये लागू किया गया।

इस संशोधन ने 2001 की जनगणना तक संसदीय और विधानसभाओं की सीटों की संख्या में बदलाव को रोक दिया। 2001 में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की गईं, लेकिन सीटों की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया।

  • नवभारत लाइव पर निहार रंजन सक्सेना की रिपोर्ट
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