

गोंदिया जिले में बुधवार दोपहर से शुरू हुई बारिश गुरुवार को भी जारी रही।
जिले में हल्की धान फसल की करीब 30 से 40 प्रतिशत कटाई पूरी होने की जानकारी है।
खेतों में काटकर रखी धान की गंजी भीगने से अंकुरण और सड़ने का खतरा बढ़ा।
कम बारिश के कारण इस खरीफ सीजन में पहले ही फसल प्रभावित हुई थी।
किसान बैंक और निजी कर्ज की किस्तें चुकाने को लेकर चिंतित हैं।
Paddy Crop Damage Gondia: गोंदिया जिले में इस वर्ष कम बारिश के बावजूद किसानों ने मेहनत और मोटर पंप से सिंचाई कर धान की फसल तैयार की। अब कटाई के बाद खेतों में सूखने के लिए रखी फसल पर चक्रवाती तूफान का असर पड़ने लगा है। जिससे किसान चिंतित हैं। बुधवार दोपहर से हो रही बूंदाबांदी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
गुरुवार, 29 अक्टूबर को भी दिन भर बारिश होते रही। किसानों को डर है कि खेतों में पानी जमा होने से कटी धान की फसल सड़ सकती है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिले के कई गांवों में धान की कटाई शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, जिले में 30 से 40 प्रश। हल्के धान फसल की कटाई हो चुकी है।
महाराष्ट्र में गुणवत्तापूर्ण खरीफ धान उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले गोंदिया जिले के किसानों की मुश्किलें इस साल लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले वारिश की अनियमितता और सूखे जैसी स्थिति ने धान की फसल को प्रभावित किया, वहीं अब फसल कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
इस खरीफ सीजन में मानसून की शुरुआत से ही बारिश ने किसानों को इंतजार कराया। समय पर पानी नहीं मिलने से कई किसानों को देर से बुआई करनी पड़ी। गोंदिया जिले में अनेक क्षेत्रों में रोपाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण नर्सरी में तैयार धान के पौधे सूख गए।
जिन किसानों ने कुओं के पंप या सीमित बारिश के सहारे किसी तरह फसल तैयार की, उन्हें भी अपेक्षा के अनुरूप उत्पादन नहीं मिल पाया, सूखे और कम उत्पादन से पहले ही परेशान किसान अब खेतों में तैयार हुई थोड़ी-बहुत फसल को बचाने में जुटे थे।
इसी बीच बुधवार सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और दोपहर करीब 3 बजे जिले के कई क्षेत्रों में अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। यह बारिश दूसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहने से खेतों में खड़ी फसलों के साथ कटाई के बाद खेतों में रखें धान को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
लगातार बदलते मौसम और फसल को हो रहे नुकसान ने किसानों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अब प्रभावित किसानों को नुकसान का आकलन और राहत मिलने की उम्मीद है।
पूरे साल खेतों में मेहनत करने के बाद भी अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने से किसान आर्थिक संकट में हैं, ऐसे में बैंक के फसाल कर्ज, राष्ट्रीयकृत व ग्रामीण बैंकों की किस्तों और निजी तौर पर लिया गया सोने के बदले कर्ज चुकाने की चिंता उन्हें परेशान कर रही है।
बारिश के कारण खेतों में काटकर रखी गई धान की गंजी भीग गई। लगातार नमी रहने से धान में अंकुर निकलने और फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। कुछ क्षेत्रों में धान के काले पड़ने की भी जानकारी सामने आई है। इससे किसानों को उपज की गुणवत्ता और उचित कीमत मिलने को लेकर चिंता सता रही है।
बेमौसम बारिश से चान की फसल को हुए नुकसान की स्थिति का जायजा लेना आवश्यक है। खेती में कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा पानी जमा न होने देने के लिए किसान आवश्यक सावधानी बरते, प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान की जानकारी लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-निलेश कानवडे, कृषि अधिकारी, गोंदिया