स्मार्ट मीटर विवाद (सौजन्य-नवभारत)
Mahavitaran Electricity Bill: सड़क अर्जुनी व देवरी तहसील में महावितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है और अब इस प्रक्रिया पर नागरिकों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाते समय पूरी जानकारी दिए बिना ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है।
नागरिकों के अनुसार, स्मार्ट मीटर में ऐसा सिस्टम लगाया गया है कि अगर कोई ग्राहक एक महीने के अंदर बिजली का बिल नहीं भरता है, तो 30 से 32 दिन बाद बिजली अपने आप कट जाती है। उसके बाद, ग्राहक द्वारा बिल चुकाने के कुछ समय बाद बिजली फिर से शुरू हो जाती है।
महावितरण की कोर्ट गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी ग्राहक की लाइट बंद करने से पहले 15 दिन पहले नोटिस दिया जाता है। लेकिन यह महावितरण की लापरवाही है कि बिना कोई पहले से नोटिस दिए ग्राहक की लाइट काट दी जाती है। नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि महावितरण के कर्मचारी – अधिकारी ग्राहकों को इस जरूरी जानकारी के बारे में पहले से नहीं बताते हैं।
नागरिकों का कहना है कि जब घर पर कोई नहीं होता, तब कर्मचारी स्मार्ट मीटर लगाने आ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कई गरीब और किसान परिवारों को एंड्रॉयड मोबाइल या ऑनलाइन सिस्टम की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए, उन्हें एसएमएस या मेल से भेजे गए नोटिफिकेशन की जानकारी नहीं मिलती।
यह भी पढ़ें – 198 परिवारों की चीखें हैं ये! इंसान और बाघ की जंग में फेल हुआ प्रशासन; कब लागू होगी एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट?
ऐसे में, अगर समय पर बिल नहीं भरा गया, तो अचानक बिजली कटने पर गरीब परिवारों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इन सबके चलते, क्या महावितरण स्मार्ट मीटर के नाम पर नागरिकों के साथ धोखा कर रहा है? यह सवाल अब स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं। प्रशासन से मांग है कि इस मामले पर संज्ञान ले और नागरिकों को सही जानकारी दे।
सड़क अर्जुनी के अभियंता सुनील रेवतकर ने बताया कि हम ग्राहकों को स्मार्ट मीटर के बारे में कोई जानकारी नहीं देते हैं। हमारा एक टारगेट होता है। अगर हम ग्राहकों को स्मार्ट मीटर के बारे में पूरी जानकारी देंगे, तो ग्राहक हमें स्मार्ट मीटर बदलने नहीं देंगे। स्मार्ट मीटर का बिल नहीं भरने पर 30 से 45 दिन बाद ऑटोमैटिक लाइट बंद हो जाती है। बिल भरने के बाद ऑटोमैटिक लाइट चालू हो जाती है।