Gondia News: ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ते गैस संकट ने स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई दुकानदार अब आधुनिक गैस सिलेंडर की बजाय पारंपरिक लकड़ी की भट्टी का सहारा लेने को मजबूर हैं. जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में लगातार कमी देखी जा रही है.
समय पर सिलेंडर न मिलने और कीमतों में बढ़ोतरी के कारण छोटे होटल और ढाबा संचालकों का बजट बिगड़ गया है. ऐसे में जीविका चलाने के लिए उन्होंने फिर से पुराने तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया है.
स्थानीय होटल संचालकों का कहना है कि लकड़ी की भट्टी पर खाना बनाना न सिर्फ समय लेने वाला है, बल्कि इससे धुआं और प्रदूषण भी बढ़ता है. इसके बावजूद उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है.
एक दुकानदार ने बताया, गैस समय पर मिलती नहीं है और जब मिलती है तो महंगी होती है, इसलिए हमें मजबूरी में लकड़ी का उपयोग करना पड़ रहा है. इस समस्या का असर ग्राहकों पर भी पड़ रहा है.
खाना बनने में अधिक समय लगने से ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है, जिससे व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर ग्रामीणों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस आपूर्ति को सुचारु बनाया जाए और कीमतों को नियंत्रित किया जाए, ताकि उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े.
अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है.घर और व्यवसाय हो रहे प्रभावित पहले गैस सिलेंडर आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब हफ्तों इंतजार करना पड़ता है. इससे घर का काम और छोटे व्यवसाय दोनों प्रभावित हो रहे हैं. मनोहर राजपुरोहित, दुकानदार
लकड़ी व उपलों का ले रहे सहारा गैस नहीं मिलने से हमें फिर से लकड़ी और उपलों का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे धुआं होता है, जिससे आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है. निर्मला हरिनखेड़े, गृहणी