Gondia District News: अर्जुनी मोरगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले केशोरी गांव को तहसील का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। करीब 7 हजार की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव के नागरिक पिछले 22 वर्षों से तहसील निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं होने से असंतोष बढ़ता जा रहा है।
गड़चिरोली और चंद्रपुर जिलों की सीमा से सटे केशोरी की दूरी तहसील मुख्यालय अर्जुनी मोरगांव से 70 किलोमीटर से अधिक है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां के नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
तहसील निर्माण संघर्ष समिति द्वारा वर्षों से इस मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। सर्वदलीय स्तर पर भी कई बार शासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केशोरी भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से तहसील बनने के सभी मानकों को पूरा करता है। यहां पुलिस स्टेशन, दो एओपी, बैंक शाखाएं, शैक्षणिक संस्थान, महाविद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजस्व मंडल कार्यालय और वन विभाग सहित कई शासकीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।
केशोरी 45 गांवों के लिए प्रमुख बाजार केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। क्षेत्र में मिर्ची उत्पादन का बड़ा बाजार भी यहां संचालित होता है। साथ ही प्रतापगढ़, इटियाडोह, तिब्बती कैंप जैसे पर्यटन स्थलों की निकटता भी इसके महत्व को बढ़ाती है।
ग्रामीणों का मानना है कि केशोरी को तहसील का दर्जा मिलने से आदिवासी बहुल क्षेत्र की प्रशासनिक दिक्कतें कम होंगी और विकास को गति मिलेगी। जंगल आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास संभव होगा।
शासन से जल्द निर्णय की अपेक्षा के साथ क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी मांग पर सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई है।