गोरेगांव तहसील का विकास ठप: दो-दो विधायकों के प्रतिनिधित्व के बाद भी सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
Goregaon Tahsil development: दो विधायकों के बावजूद गोरेगांव तहसील में सिंचाई, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति दयनीय है। कलपाथरी और कटंगी प्रकल्प विफल रहे हैं और युवा पलायन करने को मजबूर हैं।
Gondia News: गोरेगांव तहसील जो तिरोड़ा व अर्जुनी मोरगांव दो विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित है, विडंबना यह है कि दोदो विधायकों का प्रतिनिधित्व मिलने के बावजूद विकास के मामले में लगातार पिछड़ती जा रही है।
सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में तहसील के अधिकांश गांव वर्षों से गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। तहसील की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, लेकिन सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शासन द्वारा बनाए गए कलपाथरी और कटंगी मध्यम प्रकल्प किसानों के लिए उम्मीद की किरण थे, लेकिन ये परियोजनाएं अब केवल नाम मात्र की रह गई हैं। कलपाथरी प्रकल्प से केवल मोहाड़ी, कमरगांव और बबई के किसानों को आंशिक लाभ मिल रहा है। देऊटोला, म्हसगांव, बोटे, झांजिया और दवडीपार जैसे गांव अब भी सिंचाई से वंचित हैं।
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इसी तरह, कटंगी प्रकल्प का लाभ भी सीमित क्षेत्रों तक ही सिमट गया है। कटंगी, पुरगांव और सिलेगांव को कुछ फायदा मिल रहा है, जबकि चंद्रपुरटोली, हिरडामाली, हलबीटोला और गोरेगांव शहर के किसान आज भी इंतजार कर रहे हैं। करोड़ों रु। खर्च कर बनाई गई नहरें खेतों तक पानी पहुंचाने में विफल रही हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
रोजगार के अवसरों का अभाव
तहसील में रोजगार सृजन की स्थिति भी चिंताजनक है। हिरडामाली में स्थापित महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल MIDC का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना था, लेकिन यह परियोजना भी प्रभावी नहीं हो पाई है। शिक्षित युवा रोजगार के लिए अन्य शहरों और राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।
तिरोड़ा स्थित अदानी पावर प्लांट में भी स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। हजारों युवा आज भी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं और परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। गोरेगांव तहसील में दो विधायकों का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय है।
यदि जल्द ही सिंचाई, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में ठोस पहल नहीं की गई, तो क्षेत्र का विकास और अधिक प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति
तहसील में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी बेहद खराब है। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों और आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए गोंदिया रेफर करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।
शिक्षा व्यवस्था संकट में
शिक्षा क्षेत्र में भी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिप स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूल जर्जर इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जहां छात्र खतरे के साए में पढ़ाई कर रहे हैं। नए भवनों के प्रस्ताव जिप में लंबित पड़े हैं।
डिजिटल शिक्षा और तकनीकी संसाधनों की भी भारी कमी है। उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए छात्रों को गोंदिया और नागपुर जैसे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल
इन सभी समस्याओं के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जाने से आम जनता में नाराजगी है। वर्षों से लंबित समस्याओं पर ध्यान न देने से विकास की रफ्तार पूरी तरह थम गई है।
