गोंदिया प्रशासन की अनदेखी, ठाना में पानी टंकी पर चढ़कर किया प्रदर्शन, मांगें न मानी तो होगा और आंदोलन
Thana Prahar Water Protest: गोंदिया के ठाना में प्रहार जनशक्ति पार्टी के कार्यकर्ता पानी टंकी पर चढ़े। मनरेगा भुगतान, राजस्व मामले और सड़क मरम्मत समेत 7 मांगों पर प्रशासन की अनदेखी से भड़का आक्रोश।
- Written By: केतकी मोडक
ठाणे में पानी की टंकी (सोर्स- फोटो नवभारत )
Gondiya Prahar Jan Shakti Water Protest: गोंदिया प्रशासन द्वारा जनता के लंबित मुद्दों की लगातार अनदेखी किए जाने के खिलाफ प्रहार जनशक्ति पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। आमगांव तहसील के ठाना में चल रहा आंदोलन गुरुवार को उस समय एक अलग मोड़ पर पहुंच गया, जब प्रशासन की बेरुखी से नाराज कार्यकर्ता गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गए।
राजस्व विभाग में लंबित मामले, मनरेगा का रुका हुआ भुगतान, सेवा गारंटी अधिनियम का खुला उल्लंघन और गिधाड़ी-जवरी-चिरचाड़बांध सड़क की जर्जर स्थिति जैसी प्रमुख मांगों को प्रशासन द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी से नाराज होकर कार्यकर्ताओं ने यह तीव्र आंदोलन किया।
उल्लेखनीय है कि जून माह से ही प्रहार जनशक्ति पार्टी की ओर से विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर ठाना में धरना आंदोलन शुरू किया गया है, जिसे ग्रामीणों का भारी प्रतिसाद मिल रहा है। इसके बावजूद, राजस्व विभाग, पंचायत समिति व सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) का एक भी जिम्मेदार अधिकारी आंदोलनकारियों से चर्चा करने के लिए मौके पर उपस्थित नहीं हुआ, जिससे प्रदर्शनकारियों में तीव्र आक्रोश व्याप्त हो गया।
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शासन के इस निष्क्रिय रवैये के खिलाफ प्रहार जनशक्ति पार्टी के आमगांव तहसील प्रमुख दीपक जियालाल भोयर, गोंदिया जिला पदाधिकारी खुमेंद्र कावड़े व अन्य कार्यकर्ता सीधे गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस घटना से पूरे परिसर में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।
इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि न्यायालय के आदेशों के क्रियान्वयन, राजस्व विभाग के लंबित मामलों में सुधार, मनरेगा के रुके हुए भुगतान और सड़क मरम्मत के संबंध में शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रशासन से मुख्य मांगें
- सभी लंबित राजस्व प्रकरणों का शीघ्रता से निस्तारण किया जाए।
- न्यायालय के विभिन्न आदेशों पर तुरंत अमल किया जाए।
- संशोधन क्रमांक 1881 मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की जाए।
- सेवा गारंटी अधिनियम का उल्लंघन करने वाले लापरवाह अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
- मनरेगा मजदूरों, ग्राम पंचायतों और आपूर्तिकर्ताओं (सप्लायर्स) के बकाया बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए।
- गिधाड़ी-जवरी-चिरचाड़बांध सड़क की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए।
- नागरिकों के आवेदनों व शिकायतों पर एक निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने की सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जाए।
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मांगें पूरी नहीं होने पर और तीव्र आंदोलन की चेतावनी
पानी की टंकी पर प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर हालात को काबू में करने की कोशिश की। हालांकि, आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में लिखित या ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। प्रहार जनशक्ति पार्टी द्वारा प्रशासन को दी गई इस चेतावनी को अब बेहद गंभीर माना जा रहा है। नेताओं ने संकल्प जताया है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे और अधिक मजबूत लोकतांत्रिक तरीके से रास्ते पर उतरेंगे।
