गोंदिया में गहराया जल संकट; वैनगंगा नदी का जलस्तर गिरा, परियोजनाओं में पानी कम, अगले दो महीने चुनौतीपूर्ण
Gondia Water Crisis: गोंदिया में जल संकट गहरा रहा है, वैनगंगा नदी का पानी निचले स्तर पर पहुंच गया है। नागरिकों को पानी लाने में कठिनाई हो रही है।
Wainganga River Drinking Water Scarcity: वैनगंगा नदी के निचले स्तर पर पहुंचने से गोंदिया शहर और आसपास के दो गांवों, कुड़वा और कटंगी में पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। अच्छी बात यह है कि पुजारीटोला प्रकल्प से पानी मिलेगा। लेकिन, जिले के बड़े प्रकल्प भी अपने निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, और उनमें बहुत कम पानी बचा है।
ऐसे में, अगले दो महीने मुश्किल लग रहे हैं और जिले में जल संकट के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि जिला टैंकर मुक्त है, लेकिन ग्रामीण हकीकत कुछ और है। गांवों में नागरिकों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है। इस बीच, जिले के लिए गंभीर बात यह है कि गोंदिया शहर और उससे सटे दो गांवों कटंगी और कुड़वा को पानी की आपूर्ति करने वाली वैनगंगा नदी साथ छोड़ने वाली है। 1012 दिनों के लिए ही पर्याप्त पानी होने से महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की टेंशन बढ़ गई है।
सौभाग्य से, पुजारीटोला परियोजना से पानी लाने का प्रावधान किया जाएगा। लेकिन पुजारीटोला परियोजना में भी करीब 29.053 एमसीएम यानी 66.75 प्रश. जल भंडारण है। ऐसे में यहां से पानी लाकर गोंदिया और दो गांवों के नागरिकों की प्यास बुझाई जाएगी। लेकिन, यह स्थिति आने वाली गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है। यह स्थिति अभी उत्पन्न हुई है और मई व जून माह में जब गर्मी चरम पर होगी, तब जिले में क्या होगा, यह सोच कर ही पसीने छूट रहे हैं।
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ऐसी ही स्थिति पिछले चारपांच वर्षों में उत्पन्न हुई थी और इस वर्ष भी इसकी पुनरावृत्ति होने की संभावना है। भयावह स्थिति के संकेतसीमेंट के जंगल और पेड़ों के काटे जाने के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है और तीन ऋतुओं का चक्र बाधित हो गया है। अप्रैल का महीना खत्म होने को है, पारा 43 डिग्री तक जा रहा है और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री तक चला गया है।
अभी गर्मी भी पूरी तरह नहीं आई है फिर भी पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। नागरिकों को पानी के लिए दूरदूर भटकना पड़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये पर्यावरण से छेड़छाड़ का नतीजा है और भविष्य में भयावह समय का संकेत है। इसके चलते अभी से पेड़ लगाने और जल ही जीवन मंत्र पर अमल करने की सलाह दी जा रही है।
परियोजनाओं की हालत खराबजिले में सिरपुर, कालीसरार, पुजारीटोला और इटियाडोह चार प्रमुख जल परियोजनाएं हैं। जिले का जल प्रबंधन इन पर निर्भर है। लेकिन आज इन परियोजनाओं की हालत खराब है। 21 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार सिरपुर परियोजना में 26.18 प्रश। जल भंडारण है। पुजारीटोला परियोजना में 66.75 प्रश., कालीसरार परियोजना में 39.90 प्रश. व इटियाडोह परियोजना में 36.92 प्रश. जल भंडारण है।
इसके अलावा मध्यम परियोजना में सिर्फ 34 प्रश. जल भंडारण बचा है और मामा तालाबों का जलस्तर निम्नतम स्तर तक पहुंच चुका हैं। ऐसे में अगले दो माह में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ेगा।
जलापूर्ति की जिम्मेदारीगोंदिया शहर के नागरिकों की पानी की मांग है। पुजारीटोला परियोजना से गोंदिया वासियों की प्यास बुझती है। इसके लिए 10 एमएल पानी रिजर्व रखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों की प्यास बुझाने की जिम्मेवारी जिला परिषद प्रशासन की है।
