नक्सलमुक्त सालेकसा में विकास का ‘वनवास’ कब होगा खत्म? घोषणा के बाद अब बुनियादी सुविधाओं की दरकार
Gondia News: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील नक्सलवाद से मुक्त हो गई है, लेकिन विकास की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए अभी भी कई चुनौतियाँ हैं।
Gondia Naxalism News: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील पिछले चार दशकों से नक्सलवाद की गंभीर समस्या से जूझती रही है। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के कारण विकास कार्य लंबे समय तक बाधित रहे।
अब जब केंद्र सरकार ने 31 मार्च को इन इलाकों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है, तो लोगों के मन में उम्मीद जगी है कि क्या अब यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा में शामिल हो पाएगा। सालेकसा तहसील सहित जिले के कई हिस्से 1990 से 2010 के बीच नक्सल गतिविधियों के प्रभाव में रहे। इस दौरान ग्रामीणों का जीवन भय और असुरक्षा के माहौल में बीता।
प्रशासनिक पहुंच सीमित रही और कई गांव विकास से वंचित रह गए, आजादी के 75 से अधिक वर्षों के बाद भी कई पहाड़ी और दूरस्थ गांवों में पक्की सड़कें, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। इससे क्षेत्र को पिछड़ा माना जाता है।
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योजनाओं का लाभ नहीं मिलता कई मामलों में यह सामने आया कि आदिवासियों के नाम पर मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरुरतमंदों तक नहीं पहुंच पाया। वहीं कुछ योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गईं, जिससे आदिवासी समाज विकास से दूर रह गया।
पुलिस विभाग द्वारा चलाई गई दादालोरा खिड़की योजना के तहत गांव गांव जाकर लोगों की समस्याएं जानी गई और उनके समाधान का प्रयास किया गया। इससे लोगों में जागरुकता बढ़ी और कई लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। युवाओं को भी रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली।
सरकार ने विकास और सुरक्षा, समर्पण और पुनर्वास तथा विकास और विश्वास जैसी नीतियों के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाया। इसके चलते कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और अंततः इन क्षेत्रों को नक्सल मुक्त घोषित किया गया।
नक्सल मुक्त घोषणा के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकारी योजनाएं वास्तव में दूरदराज के गांवों तक पहुंचे। सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में ठोस कार्य होने से ही सालेकसा में विकास की नई सुबह संभव है।
