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खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का गोंदिया राइस एक्सपोर्ट पर असर, पूर्वी विदर्भ का चावल निर्यात हुआ ठप

Gulf Countries में चल रहे युद्ध का असर अब चावल उद्योग पर भी पड़ने लगा है। गोंदिया समेत पूर्वी विदर्भ से चावल का निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे राइस मिल संचालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

  • Written By: प्रिया जैस
Updated On: Mar 16, 2026 | 02:03 PM

गोंदिया चावल मिल (सौ. सोशल मीडिया )

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Gulf War Impact Gondia Rice Export: खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब देश के उद्योगों पर भी साफ दिखने लगा है। जिले में बड़ी संख्या में राइस मिलें हैं, जिन पर हजारों मजदूरों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी निर्भर है। लेकिन, युद्ध का चावल एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ा है, और पिछले पंद्रह दिनों से खाड़ी देशों को चावल एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद है।

पूर्वी विदर्भ के पांच जिलों गोंदिया, भंडारा, गढ़चिरोली, चंद्रपुर और नागपुर में करीब 1,110 राइस मिलें चल रही हैं। जिले में पैदा होने वाले चावल की घरेलू बाजार के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी बहुत मांग है। ईरान, कतार, सऊदी अरब, इजराइल और साउथ अफ्रीका जैसे देशों को बड़ी मात्रा में चावल एक्सपोर्ट किया जाता है।

चल रहे युद्ध के हालात की वजह से इन देशों को एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया है। एक्सपोर्ट रुकने की वजह से पहले ही भेजे जा चुके सैकड़ों कंटेनर मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट पर फंसे हुए हैं। इस वजह से व्यापारियों का करोड़ों रु का लेन देन रुक गया है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। एक्सपोर्ट रुकने से स्थानीय बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ गई है और कीमत तेजी से गिर गई है।

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सरकार गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान दे

खरीदार न होने की वजह से व्यापारियों के लिए माल जमा करने का समय आ गया है। सरकार को पिछले चार सालों से धान और परिवहन खर्च का बकाया नहीं मिला है। गोंदिया, भंडारा, चंद्रपुर और गढ़चिरोली जिलों में करीब 850 राइस मिलें कस्टम मिलिंग करती हैं।

अगर इन मिलर्स को सरकार से मिलिंग और परिवहन खर्च का बकाया मिल जाए, तो वे बैंक कर्ज चुका पाएंगे और अपने आर्थिक लेन-देन को सुचारू रख पाएंगे। इस बीच, राइस मिलर्स एसोसिएशन की मांग है कि सरकार इस गंभीर स्थिति पर तुरंत ध्यान दे।

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4 लाख टन चावल रुका

गोंदिया से औसतन प्रतिवर्ष 4 लाख मेट्रिक टन चावल निर्यात होता है। साउथ, इस्ट आफ्रीका तथा गल्फ देशों को होता है। लगभग 1200 करोड़ रु। का निर्यात होता है। युद्ध के कारण सब बंद हो गया है। पोर्ट पर बहुत चावल निर्यात के लिए गया था लेकिन रुक गया है। राइस मिलों में भी बहुत स्टाक रह गया है जो अब बहुत नुकसान देह है। इंडिया के सभी पोर्ट पर सभी राज्यों का कुल 4 लाख टन चावल रुका है।
– सर्वेश भुतड़ा, उपाध्यक्ष, राईस मिलर्स एसोसिएशन, गोंदिया

Gondia rice export hit by gulf war containers stuck at port

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Published On: Mar 16, 2026 | 02:03 PM

Topics:  

  • Basmati Rice
  • Gondia News
  • Maharashtra

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