

Gondia Goregaon Saleksa Rainfall Paddy Kharif Crop: गोंदिया जिले में मानसून की विदाई से पहले हुई लगातार बारिश ने धान की फसल को राहत दी है। 28 सितंबर तक जिले में औसतन 1,136.4 मिमी यानी 94.1% बारिश दर्ज हुई। गोरेगांव और सालेकसा तहसील औसत से आगे निकल गई हैं। हालांकि करीब 35 हजार हेक्टेयर धान फसल पर कीट-रोगों का संकट बना हुआ है।
मानसून की विदाई में अब महज दो दिन शेष हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश थमने के बीच गोंदिया जिले में पिछले दो दिनों में हुई झमाझम बारिश ने किसानों को राहत दी है। लगातार बारिश से जिले में बारिश की कमी तेजी से पूरी होती दिखाई दे रही है।
28 सितंबर तक जिले में औसतन 1,136.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो अपेक्षित बारिश का करीब 94.1 प्रतिशत है। जिले में इस वर्ष औसतन 1,220.3 मिमी बारिश अपेक्षित है। धान की फसल के गर्भावस्था के दौर में बारिश की जरूरत थी। ऐसे समय हुई बारिश से खेतों में खड़ी फसल को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
बारिश के आंकड़ों के अनुसार गोरेगांव और सालेकसा तहसीलों ने औसत बारिश का आंकड़ा पार कर लिया है। गोरेगांव में 1,025.9 मिमी अपेक्षित बारिश के मुकाबले अब तक 1,225.7 मिमी यानी 120.8 प्रतिशत बारिश हुई है।
वहीं सालेकसा में 1,158 मिमी अपेक्षित बारिश के मुकाबले 1,234.2 मिमी यानी 107.7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। गोंदिया, आमगांव और तिरोड़ा में बारिश 90 प्रतिशत के भीतर रही, जबकि देवरी, अर्जुनी मोरगांव और सड़क अर्जुनी में 90 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
शासकीय रिकॉर्ड में बारिश की गणना 30 सितंबर तक की जाती है। औसत लक्ष्य पूरा करने के लिए जिले में अभी करीब 84 मिमी बारिश की कमी है। पिछले दो दिनों की बारिश को देखते हुए इस कमी के पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।
इस वर्ष जिले में करीब 1 लाख 94 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। हालांकि बारिश की कमी और लंबे समय तक बादल छाए रहने के कारण मावा, तुडतुड़ा समेत विभिन्न कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ा है।
कृषि विभाग की प्राथमिक जानकारी के अनुसार करीब 35 हजार हेक्टेयर धान फसल प्रभावित होने की स्थिति में है। किसानों ने कीट नियंत्रण के लिए तीन से चार बार महंगे कीटनाशकों का छिड़काव किया, लेकिन अपेक्षित असर नहीं होने की शिकायत है।
जिला अधीक्षक कृषि नीलेश कानवडे के अनुसार प्रभावित क्षेत्र की प्राथमिक रिपोर्ट मंगाई गई है और किसानों को कीट नियंत्रण के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि पत्तियां पीली पड़ने और पौधों की बढ़वार रुकने से तैयार फसल को नुकसान का खतरा है। उन्होंने प्रभावित गांवों में तत्काल निरीक्षण कर वस्तुनिष्ठ पंचनामे करने तथा नियमानुसार आर्थिक सहायता और फसल नुकसान की भरपाई देने की मांग की है।