

Gondia Cyber Crime: देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए गोंदिया पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले 'म्यूल बैंक खातों' के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एनसीआरपी पोर्टल तथा समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी और शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर ऐसे बैंक खातों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी अब अपने बैंक खातों का उपयोग करने के बजाय अन्य लोगों के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने अथवा दूसरे खातों में भेजने के लिए कर रहे हैं। कई बार लोगों को यह कहकर झांसा दिया जाता है कि उनके खाते में फंड, जीएसटी रिफंड, सिविल कार्य का भुगतान या लोन की राशि आने वाली है, वहीं कुछ मामलों में रिश्तेदार के बीमार होने या बैंक खाते की लिमिट समाप्त होने जैसी झूठी बातें बताकर कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
गोंदिया जिले में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत अब तक विभिन्न पुलिस थानों में 15 म्यूल बैंक खातों के खिलाफ अपराध दर्ज किए जा चुके हैं।गोंदिया पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, चेकबुक, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते का उपयोग करने दें।
यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी या संदेहास्पद गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं या www।cybercrime।gov।in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें। साथ ही निकटतम पुलिस स्टेशन अथवा साइबर पुलिस स्टेशन, गोंदिया से संपर्क करें। पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे व अपर पुलिस अधीक्षक अभय डोंगरे के मार्गदर्शन में साइबर सेल गोंदिया तथा जिले के सभी पुलिस थानों द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ यह विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
म्यूल बैंक खाता वह खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराची ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन के लिए करते हैं। अपराधी बैंक खाते के साथ एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, यूजर आईडी, पासवर्ड और ओटीपी जैसी बैंकिंग जानकारी लालच या कमीशन देकर हासिल कर लेते हैं। इसके बाद ठगी की रकम इन खातों में जमा कर एटीएम या चेक के माध्यम से निकाल ली जाती है।