

Gondia Police Family Reconciliation: गोंदिया कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ गोंदिया जिला पुलिस की 'भरोसा सेल' ने वर्ष 2025-26 में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को अच्छे से निभाते हुए उल्लेखनीय कार्य किया है। पारिवारिक विवादों, विचारधारा के मतभेदों और लगातार विवाद की वजह से टूटने की कगार पर पहुंचे 385 मामलों में से 369 मामलों में समुपदेशन के माध्यम से सफल समझौता करवाया गया है। इसी वजह से, 'भरोसा सेल' ने पारिवारिक विवादों की वजह से टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्तों को समझ और समझौते से फिर से जोड़ने का काम किया है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पति-पत्नी के बीच बातचीत की कमी, घरेलू तनाव और गलतफहमियों की वजह से विवादों की दर बढ़ गई है। ऐसे मामलों में सीधे मामले दर्ज करने के बजाय, 'भरोसा सेल' के जरिए पहले समुपदेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दोनों पक्षों को शांति से सुनने और उनके मतभेदों को सुलझाने पर जोर दिया जाता है। इस सेल में न सिर्फ पुलिस अधिकारी, बल्कि अनुभवी समुपदेशक, महिला दक्षता समिति के सदस्य, कानूनी जानकार और स्वास्थ्य तज्ञ भी शामिल हैं।
मामले की गंभीरता के हिसाब से चरण चरण में समुपदेशन किया जाता है। महिलाओं को कानूनी कानूनी सुरक्षा सुरक्षा और मानसिक आधार भी दिया जाता है, जिससे कई परिवारों को फिर से जुड़ने का मौका मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 'भरोसा सेल' को कुल 385 शिकायतें मिलीं। इनमें से 342 शिकायतें महिलाओं ने और 43 शिकायतें पुरुषों ने दर्ज कराईं। 'भरोसा सेल' ने इन मामलों को रिकॉर्ड किया और दोनों पक्षों के बीच
इनमें से 164 मामले समझौते से, 105 मामले स्वतंत्र और 100 मामले फाइल किए गए। कुल 369 मामलों में दोनों पक्षों की बात शांति से सुनी गई और उनके मतभेद सुलझाए गए, जबकि बाकी मामलों में मामला दर्ज करके कानूनी कार्रवाई की गई।
वर्ष 2025-26 में 'भरोसा सेल' को 385 मामले मिले। इनमें से 44 मामले में केस फाइल किए गए। इससे पता चलता है कि समुपदेशन से विवाद सुलझाने का पर्याय ज्यादा असरदार साबित हो रहा है। पुलिस का मानना है कि कानूनी प्रक्रिया में उलझने के बजाय अगर आपसी सहमति से हल निकाला जाए तो पारिवारिक सिस्टम को बचाया जा सकता है।
गोंदिया पुलिस 'भरोसा सेल' के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा परिवारों को एक साथ रखने की कोशिश कर रही है, और इस पहल से समाज में अच्छे बदलाव आ रहे हैं। यह बात वर्ष 2025-26 में भरोसा सेल को मिली शिकायतों से साफ है। 2025 में 385 शिकायतें मिलीं। इसकी तुलना में 2024-25 में 447 शिकायतें मिलीं। इसकी तुलना में, 2025 में 62 शिकायतें मिलीं। इसलिए, यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल अलग होने की कगार पर पहुंचे परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण है।