गोंदिया की पांगोली नदी का पुनरूज्जीवन ठंडे बस्ते में, 28 बांध जर्जर; पानी को तरसते किसान
Gondia River News: पांगोली नदी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। प्रदूषण और प्रशासनिक अनदेखी के कारण 70 किमी का प्रवाह क्षेत्र नाले में तब्दील हो गया है और 28 बांध मरम्मत के अभाव में बेकार पड़े हैं।
Pangoli River Water Crisis News: गोंदिया एक समय वर्षों पूर्व गोंदिया जिले की जीवनदायीनी समझी जाने वाली पांगोली नदी आज नैसर्गिक कारणों के साथ ही मानवीय हस्तक्षेपों और क्रियाकलापों की वजह से लुप्त होने की कगार पर आ पहुंची है। नदी के किनारे खड़े होकर देखने पर इसकी मरणासन्न अवस्था दिखाई पड़ेगी। दिनबदिन नदी की सांसे कम होती जा रही है। जिस वजह से गोंदिया जिले का विशेषत गोंदिया, गोरेगांव और अंशत आमगांव तहसील के किसान खतरें में आ गए हैं।
साथ ही नदी का जलस्तर भी घट गया है। नदी के पानी पर निर्भर पशुपक्षी आज पानी की बुंद के लिए तरस रहे हैं। बारबार ध्यानाकर्षण करने के बावजूद प्रशासकीय और राजनीतिक उदासीनता की वजह से नदी का पुनरूज्जीवन प्रस्ताव जलसंपदा विभाग में थंडे बस्ते में प्रलंबित होने से आम नागरिकों को पानी समस्या का हर वर्ष सामना करना पड़ता है। नदी की यह स्थिती देख किसान और नागरीक भविष्य में निर्माण होने वाले जलसंकट का आभास कर गंभीर चिंतन में है।
नदी को मिलने वाले सारे नाले भी लगभग खत्म से गए हैं। नदी के नालेरूपी नैसर्गिक जलस्रोत भी धीरे धीरे नष्ट होने की वजह से एक समय वर्षभर बहने वाली नदी को आज नाले का रूप आ गया है। नदी को देखने पर इसका अस्तित्व ही आज लगभग खत्म होता सा दिखाई पड़ता है। उद्गम से संगम तक लगभग 70 किमी। का इस नदी का प्रवाह क्षेत्र है। आज से लगभग 2530 वर्ष पूर्व गोरेगांव, गोंदिया और आमगांव तहसील के किसानों के लिए वरदान के साथ सैकड़ों हेक्टर खेतजमीन इस नदी से सिंचित होती थी।
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नदी नामशेष होने की कगार परजिले का जलस्तर भी इस नदी की वजह से सकारात्मक था। लेकिन नैसर्गिक कारणों, मानवीय क्रियाकलापों और प्रशासकीय और राजनीतिक अनास्था, अनदेखी की वजह से यह नदी नामशेष होने की कगार पर आ पहुंची है। नदी के किनारों पर स्थापित अनेक राइसस मिल्स, लाख कारखानों द्वारा नदी में छोडे जानेवाले दूषित पानी की वजह से नदी पूर्णत प्रदूषित हो गई है। जिले के जो जागरूक नागरिक है, सामाजिक संस्थाएं है, उन्हें यह बात समझ में आ रही है।
वे नागरिकों व किसानों को नदी की समस्यायों से और इसके पुनरुज्जीवन, संरक्षण, संवर्धन और विकास की आवश्यकता से अवगत भी करा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरतइसी जागरूकता की वजह से पिछले 10 वर्षों से पांगोली नदी बचाओं संघर्ष कृति समिति के माध्यम से पांगोली नदी के पुनःरूज्जीवन, संवर्धन, संरक्षण और विकास का मुद्दा बारबार उठाकर शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधिओं का इस महत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान आकर्षित कर रही है।
लेकिन अभी तक शासन, प्रशासन और किसानों और नागरिकों के हित की बात करने वाले जनप्रतिनिधि इस विषय को लेकर गंभीर ही नहीं हुए हैं। कई स्थानों पर तो नदी और किनारा समतल हो गया है। पांगोली नदी पर मृदा व जलसंधारण विभाग द्वारा बनाए गए 6 कोल्हापुरी बांध और जिप लघु पाटबंधारे विभाग द्वारा बनाए गए लगभग 22 संग्रहित बांध और 1 ब्रिज कम बांध भी आज जीर्ण हो गए हैं, जिन्हें दुरुस्ती की आवश्यकता है। इन जीर्ण बांधों का किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा है।
