गोंदिया में धान खरीदी पर 'फुल स्टॉप'! 50 हजार किसानों का भविष्य अधर में, क्या 31 मार्च से पहले बढ़ेगी लिमिट?

Gondia Paddy Procurement: गोंदिया में धान खरीदी की लिमिट खत्म, 50,000 किसान अधर में। 371 करोड़ का भुगतान बकाया और बोनस पर सस्पेंस। क्या सरकार बढ़ाएगी खरीदी का लक्ष्य?
Gondia paddy procurement hits a roadblock as Govt limit ends. 50,000 registered farmers wait for a quota increase. ₹371 crore payment pending.
धान खरीदी (सौजन्य-नवभारत)
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Paddy Purchase Limit: खरीफ सीजन के लिए जिला मार्केटिंग फेडरेशन को दी गई धान खरीदी की लिमिट खत्म हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक धान खरीदने की लिमिट नहीं बढ़ाई है, जिससे धान की खरीदी रुक गई है। इस बीच 50 हजार पंजीकृत किसान असमंजस में हैं और देख रहे हैं कि सरकार लिमिट बढ़ाएगी या नहीं।

हर साल खरीफ सीजन में जिले में 40 लाख क्विंटल धान खरीदा जाता है। लेकिन, इस साल सरकार ने जिला मार्केटिंग फेडरेशन को तीन चरण में कुल 25 लाख 72 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य दिया था। लेकिन, यह लक्ष्य कम होने की वजह से इसे सिर्फ 15 दिन पहले ही पूरा कर लिया गया। इसके बाद सरकार से फेडरेशन का धान खरीदने का लक्ष्य बढ़ाने की उम्मीद थी। लेकिन, इसे नहीं बढ़ाया गया और खुले बाजार में धान का भाव कम होने की वजह से धान उत्पादक किसान असमंजस में हैं।

इस वर्ष 1 लाख 32 हजार 614 किसानों ने सरकारी धान खरीदी केंद्र पर समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। इनमें से 81 हजार 878 किसानों ने अब तक 188 केंद्रों पर 25 लाख 72 हजार क्विंटल धान बेचा है। जबकि धान बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकृत 50 हजार 736 किसान अभी भी धान बेचने का इंतजार कर रहे हैं।

इसलिए वे हर दिन फेडरेशन से लिमिट बढ़ाने की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सरकारी धान खरीदी की आखिरी तारीख 31 मार्च तक है। जिससे किसानों को उम्मीद है कि सरकार धान खरीदी की लिमिट बढ़ाएगी।

बोनस को लेकर भ्रम

हर साल सरकार धान उत्पादक किसानों को बोनस देने की घोषणा करती है। लेकिन, इस वर्ष राज्य सरकार ने अभी तक बोनस की घोषणा नहीं की है। इसलिए किसानों में इस बात को लेकर भ्रम का माहौल है कि बोनस की घोषणा होगी या नहीं।

371 करोड़ रु. का बकाया

-जिला मार्केटिंग फेडरेशन के धान खरीदी केंद्र पर धान बेचने वाले किसानों का भुगतान पिछले डेढ़ महीने से निधि की कमी के कारण बकाया है। -इस वजह से किसान आर्थिक तंगी में हैं। कई किसान समय पर अपना फसल कर्ज नहीं चुका पाए हैं, इसलिए उन्हें ब्याज का बोझ उठाना पड़ रहा है।

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